बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज में हुई दंत प्रदर्शनी
बरेली, अमृत विचार। बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज में गुरुवार को दंत प्रदर्शनी में चार स्कूलों के करीब 500 बच्चों ने उत्साह के साथ भाग लिया। इससे पहले मुख्य अतिथि एवं बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति डॉ. केशव कुमार अग्रवाल, प्रति कुलाधिपति डॉ. अशोक अग्रवाल ने बच्चों का स्वागत करते हुए उन्हें चिकित्सा क्षेत्र के बदलते परिवेश के बारे में विस्तृत जानकारी दी। मुख्य अतिथि का स्वागत कॉलेज प्राचार्य डॉ. सत्यजीत नाईक ने किया।
बच्चों को डेंटिस्ट्री के सभी नौ विभागों में भ्रमण कराकर दंत प्रदर्शनी का अवलोकन कराया गया। सबसे पहले बच्चे पीडोडोंटिक्स विभाग पहुंचे, जहां उन्हें प्ले रूम में रखे हुए गेम्स और झूले दिखाए गए, जिन्हें बच्चों के बिहेवियर मॉडिफिकेशन में इस्तेमाल किया जाता है। बच्चों को इंट्रा ओरल कैमरा भी दिखाया गया, जिसके द्वारा उन्होंने अपने दांतों को बड़े स्क्रीन पर साफ तौर पर देखा। इसके अतिरिक्त दांतों में कैसे मैग्नीफिकेशन लूप्स की मदद से आसानी से कैविटीज को देखा और उनमें मसाला भरा जा सकता है, यह समझाया और दिखाया गया। यहां बच्चों ने कॉन्शियस सेडेशन और सोल्डरिंग की मशीनें भी देखीं।
बच्चों को दूध के दांतों का महत्व, ब्रश करने का सही तरीका और दांतों में कीड़े लगने के कारण, उनकी सुरक्षा और इलाज के बारे में भी बताया गया। कुछ बच्चे एनाटॉमी विभाग में गए, जहां उन्हें कैडेवर (शव) दिखाया गया, जिसमें चेहरे और गर्दन की हड्डियों और मांसपेशियों को दिखाया और समझाया गया। कुछ बच्चे ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी विभाग में गए, उन्हें वहां दांतों का एक्स-रे लेना और देखना समझाया गया।
ओरल सर्जरी विभाग में बच्चों को चिकन पर इलेक्ट्रो कॉटरी सिखाया गया। इसके बाद बच्चे पीरियोडॉन्टिक्स विभाग में गए, जहां उन्हें दांतों में किस प्रकार गंदगी जम जाती है और उसे कैसे साफ किया जाता है, यह समझाया गया। ऑर्थोडॉटक्स विभाग में बताया गया कि कैसे ब्रेसिज लगाकर टेढ़े मेढ़े दांतों को सही किया जा सकता है। एंडोडोंटिक्स और कंजरवेटिव विभाग में उन्हें पक्के दांतों का महत्व समझाया गया। प्रदर्शनी में अधिकांश कक्षा 8 से 12वीं तक के बच्चे सम्मिलित हुए। प्रो. अंशुल, डॉ. पल्लवी और डॉ. शिवांगी मौजूद रहे।
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