अयोध्या: जिला अस्पताल में कमीशनखोरी के खेल का खुलासा, जांच समिति गठित
अयोध्या, अमृत विचार। जिला अस्पताल में कमीशनखोरी का खेल उजागर होने के बाद हलचल मची हुई है। मामले में ड्यूटी पर तैनात स्टाफ को हटा दिया गया है और प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। दलाली में शामिल अज्ञात लोगों के खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत कराया गया …
अयोध्या, अमृत विचार। जिला अस्पताल में कमीशनखोरी का खेल उजागर होने के बाद हलचल मची हुई है। मामले में ड्यूटी पर तैनात स्टाफ को हटा दिया गया है और प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। दलाली में शामिल अज्ञात लोगों के खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत कराया गया है वही औषधि निरीक्षक ने आरोपों के घेरे में आए दवा दुकान से दवाओं के बिक्री पर रोक लगा दी है।
गुरुवार को जनपद के इनायत नगर थाना क्षेत्र स्थित डीह भरथी निवासी महिला 35 वर्षीय ललिता पत्नी दिलीप को उसका देवर प्रदीप गंभीर हाल में लेकर जिला अस्पताल आया था। अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक महिला को सर्पदंश की शिकायत थी। उस समय ड्यूटी पर डॉ. राजेश सिंह और संविदा चिकित्सक डॉ. अजय तिवारी के साथ स्टाफ मौजूद था।
आरोप है कि चिकित्सक व स्टाफ की मिलीभगत से जिला अस्पताल में मौजूद दलालों ने जिला अस्पताल के बाहर स्थित एक दवा की दुकान से मोटे कमीशन के लिए इंजेक्शन खरीदवाया और महिला को लगवाया। कमीशनखोरी का आभास होने पर मरीज के परिवार ने दवा के पर्चे और बिल की मांग की तो उसके साथ आनाकानी की गई। प्रकरण में मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की गई तो जिलाधिकारी ने जिम्मेदार अधिकारियों को कार्रवाई का निर्देश दिया।
थोक की दुकान से हो रही थी फुटकर बिक्री
जिलाधिकारी के निर्देश पर औषधि निरीक्षक पीसी रस्तोगी ने जिला अस्पताल के सामने स्थित मेडिकल स्टोर पहुंचकर जांच की। हालांकि मेडिकल स्टोर संचालक ने किसी को फुटकर में इंजेक्शन बेचने से इनकार किया लेकिन जांच में इस बात की पुष्टि हुई कि दुकानदार की ओर से फुटकर में दवाओं की बिक्री की जा रही है। जबकि औषधि विभाग की ओर से उसको थोक बिक्री का लाइसेंस दिया गया है।
मामले में औषधि निरीक्षक ने दुकानदार के दवा बिक्री पर फिलहाल जांच पूरी होने तक रोक लगा दी है। वहीं पीड़ित पक्ष तथा अन्य लोग औषधि निरीक्षक पर दुकानदार से मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं। इनका कहना है कि कम से कम दुकान को सील तो कर ही देना चाहिए था जिससे कागजातों में हेराफेरी न हो सके।
अधीक्षक के नेतृत्व में होगी प्रकरण की जांच
शुक्रवार को जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक रविंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शिकायत के बाद मरीज के तीमारदारों से पहचान कराई गई लेकिन वह किसी को पहचान नहीं सका। जिसके चलते अज्ञात के खिलाफ पुलिस में मुकदमा पंजीकृत कराया गया है। उन्होंने बताया कि घटना के समय ड्यूटी पर तैनात स्टाफ फार्मासिस्ट वार्ड बॉय और स्वीपर का तत्काल प्रभाव से दूसरी जगह तबादला कर दिया गया है जहां वह मरीजों के संपर्क में न आ सके। मामले की विभागीय जांच के लिए अधीक्षक डॉ सत्येंद्र सिंह के नेतृत्व में डॉक्टर पटारिया और डॉक्टर रजत चौरसिया की समिति बनाई गई है। जांच समित को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
