बरेली: लाभार्थी कह रही नहीं मिला लाभ, अधिकारी बता रहे मिल चुका आवास

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। शनिवार को सदर तहसील में संपूर्ण समाधान दिवस में सीबीगंज इलाके के बादशाहनगर की नन्ही देवी पत्नी मुन्नालाल ने सरकारी महकमे की पोल खोलकर रख दी। महिला के आरोपों ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। पीड़िता ने कहा कि ब्लॉक की सूची में आवास के लिए उसका नाम पहले नंबर पर था। वर्षों से ब्लॉक, डीएम कार्यालय के दौड़ लगा रही हूं। ब्लॉक के कर्मचारी, एडीओ पंचायत, बीडीओ दिलासा दिलाते रहे, लेकिन न आवास बना और न ही धनराशि मिल सकी। वह बच्चों को लेकर खुले आसमान के नीचे जीवन काट रही है।

महिला की माने तो ब्लाक और विकास भवन के अधिकारी कहते हैं कि लाभ मिल चुका है। अगर मिला है तो कहीं दिखेगा ? मुख्यमंत्री पोर्टल पर कई बार आवेदन के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। महिला ने चेतावनी दी कि एक महीने में आवास नहीं मिला तो उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर आवास बनाने का आदेश पारित कराएगी और ब्लॉक कर्मचारी, विकास भवन के कर्मचारियों पर केस दर्ज कराया जाएगा। महिला ने शिकायती पत्र के साथ पीडी का पत्र भी लगाया है।

एडीएम सिटी डॉ. आरडी पांडेय ने पीडी को आदेश दिए कि मामले को गंभीरता से दिखाएं। शासन की मंशा है कि जरूरतमंद को छत मिले। 54 फरियादियों ने शिकायतें दर्ज कराईं। कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने फरियादियों की समस्याओं को सुना। आईजी डॉ. राकेश सिंह, एडीएम सिटी डॉ. आरडी पांडेय, एसपी सिटी राहुल भाटी, नगर मजिस्ट्रेट रेनू सिंह, तहसीलदार सदर राम नारायण सिंह मौजूद रहे।

केस-1
बिबियापुर कायस्थान के कुंवरपाल गांव के भूपेंद्र, श्यामलाल के साथ संपूर्ण समाधान दिवस पहुंचे। कहा कि कुछ लोगों ने चाेरी से पेड़ काट लिए हैं। आरोपी दबंग हैं। स्थानीय स्तर पर शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होने पर तहसील में गुहार लगाई है।

केस-2
मुड़िया अहमदनगर गांव के होरीलाल ने बताया कि खेत को जाने वाले चकरोड को पड़ोसी कास्तकारों ने कब्जे में कर लिया है। इस संबंध में 4 मार्च और 3 जून को संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत कर चुका हूं मगर अभी तक सुनवाई नहीं हुई है।

जमीन संबंधी मामला रखा
सैदापुर गांव निवासी कुंवरसेन, असगर अली, रसीत, सियाराम, छत्रपाल, उस्मान आदि ने संपूर्ण समाधान दिवस में बताया कि कृषि जमीन सीलिंग में दर्ज थी। उनके पूर्वजों की मौत के बाद हम लोग काबिज थे। 27 दिसंबर में जमीन को गलत तरीके से किशन लाल ने अपनी पत्नी को माता दिखाकर सीलिंग मुक्त कराकर जमीन की बिक्री कर दी। बरसों तक दौड़ भाग करने के बाद जमीन नहीं मिली। थक हार बैठ गए। फिर से जमीन मिलने की उम्मीद में गुहार लगाई है।

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