बरेली: इसी साल बनना शुरू होगा तुलसी मठ कृषि वानिकी संस्कृत विश्वविद्यालय, कई भाषाओं में शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे विद्यार्थी

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फतेहगंज पश्चिमी में तुलसी मठ की खाली पड़ी एक हजार बीघा जमीन पर होगा निर्माण, कागजी औपचारिकताएं पूरी होने की स्थिति में

बरेली, अमृत विचार। फतेहगंज पश्चिमी में तुलसी मठ की खाली पड़ी एक हजार बीघा जमीन में कृषि वानिकी संस्कृत विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए कागजी औपचारिकताएं पूरी होने की स्थिति में पहुंच गई हैं।इसी साल विश्वविद्यालय का निर्माण शुरू हो जाएगा। कृषि वानिकी की शिक्षा के साथ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की तरह संस्कृत के साथ अंग्रेजी-फारसी समेत कई भाषाओं में शिक्षा इस विश्वविद्यालय की विशेषता होगी।

तुलसी मठ कृषि वानिकी संस्कृत विश्वविद्यालय का निर्माण फतेहगंज पश्चिमी के गांव भोलापुर शंखापुर में होना है जहां मठ की करीब एक हजार बीघा जमीन खाली पड़ी है। इस विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए आध्यात्मिक शिक्षा के साथ विभिन्न भाषाओं में मनपसंद विषयों की शिक्षा प्राप्त करने का विकल्प उपलब्ध होगा। तुलसी मठ प्रबंधन लखनऊ और दिल्ली के स्तर पर विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया शुरू कर चुका है जिसके पूरा होने में कुछ महीने लगने की उम्मीद है। तुलसी मठ के महंत नीरज नयनदास ने बताया कि इस साल के अंत तक विश्वविद्यालय का निर्माण शुरू करा देने की योजना है।

ये सुविधाएं होंगी विश्वविद्यालय में
तुलसी मठ की योजना के मुताबिक विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों काे आध्यात्म और वैदिक शिक्षा के लिए विशेष सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। बीज संवर्धन, प्राकृतिक और आर्गेनिक फसल भी तैयार कराई जाएगी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की तरह संस्कृत, अंग्रेजी, फारसी समेत कई विदेशी भाषाओं में शिक्षा हासिल करने की सुविधा रहेगी। मेडिकल, नर्सिंग और योग शिक्षा का भी अध्ययन भी विद्यार्थी कर सकेंगे। विशेष रूप से गोसंवर्धन के लिए भी काम विश्वविद्यालय में शुरू किए जाएंगे।

पूरा होगा संत कमलनयन दास का सपना, निर्धन छात्रों को मिलेगी निशुल्क शिक्षा
महंत नीरज नयनदास महाराज ने बताया कि मठ की जमीन का उपयोग शिक्षा के उन्नयन के लिए करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय बनाने का निर्णय लिया गया है। यहां निर्धन विद्यार्थियों को पूरी तरह निशुल्क शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। बाकी विद्यार्थियों से भी सरकारी दरों के हिसाब से ही शुल्क लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस भूमि पर विश्वविद्यालय चलाने की योजना मठ के महंत रहे स्वामी कमल नयनदास महाराज की थी जिसे पूरा करने की दिशा में काम शुरू हो गया है।

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