रबड़ फैक्ट्री: अलकेमिस्ट ने फिर फंसाया पेच, दो दिन और टला फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट शुक्रवार को कंपनी की दलीलें सुनकर फैसला सुनाएगा
बरेली, अमृत विचार। रबड़ फैक्ट्री केस में भूमि पर मालिकाना हक के संंबंध में बार-बार पेच फंसने से फैसला टल रहा है। बुधवार को निर्धारित तारीख पर आने वाला फैसला अलकेमिस्ट रि-कंस्ट्रक्शन एसेट कंपनी की वजह से दो दिन के लिए टल गया। अलकेमिस्ट ने लिखित दलीलें प्रस्तुत करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई कर रहे न्यायाधीश से शुक्रवार तक का समय मांग लिया है।
हालांकि, राज्य सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सी सिंह ने सुनवाई के दौरान कोर्ट में लिखित प्रस्तुतियों की प्रति प्रस्तुत की। अब बॉम्बे हाईकोर्ट में शुक्रवार को तय होगा कि फैसला उसी दिन सुना दिया जाएगा या फिर अगली तारीख मिलेगी। दोपहर में बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद कोर्ट रूम में उपस्थित यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक संतोष कुमार ने प्रशासनिक अधिकारियों को पूरी स्थिति से अवगत कराया।
उधर, बुधवार शाम तक फैसला आने की खुशी में सुबह से ही रबड़ फैक्ट्री के सैकड़ों कर्मचारी एक दूसरे से जानकारी लेते रहे, लेकिन दोपहर में उन्हें मालूम हुआ कि फैसला टल गया तो उनके चेहरे लटक गए। इस केस में फैसला किसी के भी पक्ष में आए, लेकिन 400 करोड़ से अधिक की देनदारियों का भुगतान 1432 कर्मचारियों को होना है। कारपोरेट कार्य मंत्रालय के ऑफिशियल लिक्विडेटर (आधिकारिक परिसमापक) पहले ही इतने कर्मचारियों का डाटा सही मान चुका है।
बॉम्बे हाईकोर्ट में पिटीशन संख्या 999/2020 अलकेमिस्ट एसेट्स रिकंस्ट्रक्शन लिमिटेड बनाम मैसर्स सिंथेटिक एंड केमिकल्स लिमिटेड व अन्य में राज्य सरकार की ओर से हस्तक्षेप आवेदन पर सुनवाई के बाद फैसला आना है। फतेहगंज पश्चिमी में रबड़ फैक्ट्री के लिए 1960 के दशक में मुंबई के सेठ किलाचंद को 1382.23 एकड़ भूमि तत्कालीन प्रदेश सरकार ने 3.40 लाख रुपये लेकर लीज पर दी थी, जो लीज डीड बनी थी, उसमें यह शर्त शामिल की थी कि जब फैक्ट्री बंद होगी, तब सरकार जमीन वापस ले लेगी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया था। फैक्ट्री 15 जुलाई 1999 से बंद है। वर्तमान में इस भूमि की कीमत करीब 18 अरब रुपये से अधिक है।
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