भारत का कड़ा रुख

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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लंदन में खालिस्तान समर्थकों ने भारतीय उच्चायोग को घेरने की धमकी दी है। साथ ही कनाडा में अलगाववादी समूह सिख फॉर जस्टिस ने 8 जुलाई को तथाकथित खालिस्तान स्वतंत्रता रैली निकालने का ऐलान किया है। रैली के प्रचार के लिए खालिस्तान समर्थक नेताओं ने एक पोस्टर भी जारी किया है।

पोस्टर का शीर्षक ‘किल इंडिया’ रखा गया, उसमें इंडियन हाई कमिश्नर संजय कुमार वर्मा और टोरंटो में भारत के वाणिज्य दूतावास जनरल अपूर्व श्रीवास्तव पर खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप लगाया गया है।

स्थिति की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि भारत ने कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका जैसे देशों में खालिस्तानी तत्वों की गतिविधियों एवं हिंसा भड़काने की घटनाओं को ‘अस्वीकार्य’ करार देते हुए गुरुवार को कहा कि दूसरे देशों में राजनयिकों, अपने मिशन की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और मेजबान देशों से वियना संधि के अनुरूप दूतावासों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की उम्मीद की जाती है।

भारत ने इस मुद्दे को कनाडा सरकार से उठाया है और कहा है कि वो राजनयिकों को वहां काम करने की आजादी मुहैया कराए। इसके बाद ब्रिटिश विदेश सचिव जेम्स क्लेवरली ने कहा कि लंदन में भारतीय उच्चायोग पर कोई भी सीधा हमला पूरी तरह से अस्वीकार्य है और ऐसा होने पर कोई भी बख्शा नहीं जाएगा।

दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन देशों में खालिस्तान समर्थकों का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसे लेकर भारत में काफी आक्रोश है। गत 2 जुलाई को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित  भारतीय वाणिज्य दूतावास में न केवल तोड़फोड़ की गई बल्कि उसमें आग भी लगा दी गई। ध्यान रहे, सैन फ्रांसिस्को में यह इस तरह की पहली घटना नहीं थी। इसी वर्ष मार्च में खालिस्तान समर्थकों ने वहां वाणिज्य दूतावास में तोड़फोड़ की थी।

कनाडा में भारतीय राजनयिकों की तस्वीर प्रचारित करना तो और भी खतरनाक है। भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए जहां कनाडा के हाईकमिश्नर को समन किया, वहीं अमेरिकी सरकार से भी उपयुक्त कार्रवाई के लिए कहा। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि कट्टरपंथी, चरमपंथी खालिस्तान की विचारधारा भारत या उसके सहयोगी देशों जैसे अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के लिए अच्छी नहीं है।

उन्होंने इन देशों से खालिस्तान समर्थकों को जगह नहीं देने की अपील भी की। अफसोस जनक है खालिस्तान समर्थक तत्वों से निपटने में ये सरकारें अभी तक प्रभावी साबित नहीं हुई हैं। यह भारत की संप्रभुता और एकता एवं अखंडता से जुड़ा मसला है।

इसलिए यह सुनिश्चित करना सबके हित में है कि हिंसा में लिप्त आतंकवादी या अलगाववादी तत्वों को किसी तरह की आड़ न मिलने दी जाए। साथ ही बिना देरी किए खालिस्तानी समूहों की गतिविधियों पर रोक लगानी चाहिए। 

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