प्रयागराज : दिहाड़ी मजदूर को बना दिया लखपति; सरकारी विभाग की बड़ी चूक पर लगाई फटकार

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगातार सरकारी विभागों द्वारा काम में बरती जा रही लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए आपूर्ति विभाग को एक दिहाड़ी मजदूर के अंत्योदय राशन कार्ड के निरस्तीकरण की जांच चार हफ्तों में पूरी करने का आदेश दिया है। यह आदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्य प्रकाश केशरवानी और न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने फतेहपुर निवासी बीना देवी की याचिका पर दिया है। मामला फतेहपुर जिले के गौरी गांव में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर परिवार का है। दरअसल याची बीना देवी के पति राम किशोर दिहाड़ी मजदूर हैं। पति-पत्नी के अलावा परिवार में तीन बच्चे हैं। 

अंत्योदय योजना के तहत मिलने वाले राशन से पैंतीस सौ रुपए मासिक आय वाले इस परिवार का पालन-पोषण सितंबर 2021 तक ठीक-ठाक चल रहा था। सरकारी राशन के डीलर ने अचानक राशन देना बंद कर दिया। राशन न मिलने से परेशान परिवार ने वजह जानने की कोशिश की तो जानकारी मिली कि उनका अंत्योदय राशन कार्ड इस आधार पर निरस्त कर दिया गया है कि याची का पति 0.7610 हेक्टेयर कृषि भूमि का मालिक है। कृषि भूमि की उपज की बिक्री से याची के पति के नाम से स्टेट बैंक के खाते में चार लाख चौवन हजार तीन सौ रुपए जमा है। याची के पता करने पर जानकारी मिली कि जिस कृषि भूमि का स्वामी याची के मजदूर पति को बताया जा रहा है, वो राजस्व रिकार्ड में किसी दूसरे के नाम दर्ज है। 

इसी तरह जिस स्टेट बैंक में जमा लाखों रुपए दिहाड़ी मजदूर के बताए जा रहे हैं, उस बैंक में उसका कोई खाता ही नहीं है। सारी जानकारी इकट्ठा करने के बाद आपूर्ति विभाग द्वारा लखपति घोषित मजदूर परिवार वर्षों से सरकारी कार्यालयों में ये साबित करने के लिए घूम रहा है कि वे लखपति नहीं बल्कि दिहाड़ी मजदूर हैं। उसका परिवार राशन के अभाव में भुखमरी की कगार पर है, लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर थक चुकी याची ने अंत्योदय राशन कार्ड को पुनर्जीवित कर, राशन मुहैया कराने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए जिलापूर्ति अधिकारी, फतेहपुर को मजदूर परिवार के अंत्योदय राशन कार्ड के निरस्तीकरण की जांच चार हफ्तों में पूरी करने का आदेश दिया है।

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