लखनऊ: निजीकरण रोकने को उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में दायर की याचिका
लखनऊ, अमृत विचार। निजीकरण को रोकने के लिए उपभोक्ता परिषद ने राज्य विद्युत नियामक आयोग में लोक महत्व जनहित याचिका को दायर किया है। जिस पर आयोग ने पॉवर कार्पोरेशन से सात दिनों के अंदर इस जवाब तलब किया है। उपभोक्ता परिषद की ओर से आयोग द्वारा पूर्व में जारी आदेश को आधार बनाकर याचिका …
लखनऊ, अमृत विचार। निजीकरण को रोकने के लिए उपभोक्ता परिषद ने राज्य विद्युत नियामक आयोग में लोक महत्व जनहित याचिका को दायर किया है। जिस पर आयोग ने पॉवर कार्पोरेशन से सात दिनों के अंदर इस जवाब तलब किया है।
उपभोक्ता परिषद की ओर से आयोग द्वारा पूर्व में जारी आदेश को आधार बनाकर याचिका को दायर किया गया है। इस दौरान उपभोक्ता परिषद ने यह मुद्दा उठाया कि जब पावर कार्पोरेशन की उच्च स्तरीय जांच समिति द्वारा जांचोपरान्त यह खुलासा कर दिया गया है कि टोरंट पावर कम्पनी ने बिजली कम्पनी का लगभग 2221 करोड पुराना बकाया अभी तक दबा कर रखे है। इसके साथ ही करार के मुताबिक एटीएंडसी हानियां 15 प्रतिशत तक नहीं लाई जा सकीं। वहीं टोरंट द्वारा सैकडों करोड़ रुपया रेग्यूलेटरी सरचार्ज का दबा लिया।
इतना ही नहीं बिजली कम्पनी मंहगी बिजली 5.26 रुपया प्रति यूनिट में खरीदकर टोरंट पावर को 4.45 रुपया प्रति यूनिट में बेच रहा है जिससे प्रत्येक वर्ष 162 करोड़ का नुकसान हो रहा है। निजीकरण का इतना खराब परिणाम होने के बाद भी पूर्वांचल को निजी हाथों में सौंपे जाने की योजना बनाई जा रही है। परिषद की ओर से कहा गया कि आयेाग इस पर हस्तक्षेप कर रोक लगवाये और बिजनेस प्लान के तहत पूर्वांचल को सुधार की दिशा में आगे बढ़ाये।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि आज आयोग में दाखिल लोक महत्व जनहित प्रत्यावेदन में उपभोक्ता परिषद ने वर्ष 2013 में उपभोक्ता परिषद द्वारा दाखिल याचिका में आयोग द्वारा पारित आदेश को आधार बनाया गया है। जिसमें आयोग द्वारा यह आदेश पारित किया गया था कि ’’डिस्कामों द्वारा जिन भी विद्युत क्षेत्रों में निजीकरण व फेंन्चाईजीकरण की भावी कार्ययोजना है।
उससे विद्युत उपभोक्ताओं को भविष्य में क्या लाभ होगा एवं निजीकरण एवं फे्रन्चाईजीकरण के लिए चयन का मुख्य आधार क्या है से आयोग को अवगत करायें।’’ के आधार पर बिजली दर सुनवाई के बीच टोरंट द्वारा अनुबन्धों का उलंघन की रिपोर्ट आने के बाद दूसरे डिस्काम पूर्वांचल के निजीकरण की साजिश उपभोक्ता विरोधी कार्यवाही का अंग है। इसलिये आयोग अविलम्ब हस्तक्षेप कर इस पूरी असंवैधानिक प्रक्रिया को रूकवायें।
उपभोक्ता परिषद ने दाखिल अपनी याचिका में आपत्तियों के माध्यम से यह गंभीर मुददा भी उठाया कि जब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा आयोग में दाखिल बिजनेस प्लान में अगले 5 वर्षों में व्यापक सुधार के लिये रूपया 8801 करोड़ खर्च होना प्रस्तावित कर दिया है और यह स्वीकार किया है कि सुधार की योजनाओं पर काम शुरू हो गया है फिर भी जनहित में उसे निजी घरानों को सौंपने की साजिश करना अपने आप में बड़ा सवाल है।
