Kanpur: GSVM में दुर्लभ कैंसर का सफल ऑपरेशन, दुनिया में फाइब्रोमेक्सॉइड सार्कोमा का पांचवां और भारत का पहला मामला

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में दुर्लभ कैंसर का सफल ऑपरेशन।

कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में दुर्लभ कैंसर का सफल ऑपरेशन किया गया। दुनिया में फाइब्रोमेक्सॉइड सार्कोमा का पांचवां और भारत का पहला मामला है। फर्रुखाबाद के बुजुर्ग का प्राचार्य ने चार डॉक्टरों के साथ पांच घंटे ऑपरेशन किया।

कानपुर, अमृत विचार। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ने दुनिया में दुर्लभ प्रकार के कैंसर का ऑपरेशन कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। फाइब्रोमेक्सॉइड सार्कोमा का भारत में यह पहला और दुनिया का पांचवां मामला है। इससे पहले चार केस विदेशों में मिले थे। इस कैंसर से फर्रुखाबाद निवासी 65 वर्षीय मिठाई दुकानदार पीड़ित था। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने टीम के साथ पांच घंटे तक ऑपरेशन कर बुजुर्ग को नया जीवन दिया है। 
फर्रुखाबाद निवासी बुजुर्ग मिठाई दुकानदार ने मुंह में गांठ होने पर एक अस्पताल में इलाज शुरू कराया, जहां ऑपरेशन करके गांठ हटाई गई। लेकिन एक माह बाद फिर से मुंह में गांठ पड़ गई।

इस पर उन्होंने उर्सला अस्पताल में इलाज कराया। यहां बायोप्सी में कैंसर के लक्षण मिले। उर्सला में डॉक्टरों ने सर्जरी कर गांठ निकाली, जिससे बुजुर्ग को कुछ दिन तो आराम मिला, लेकिन गांठ फिर से उभर आई। हारकर वह हैलट अस्पताल पहुंचे। यहां जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला ने इलाज शुरू किया। बायोप्सी जांच में गाल व जबड़े में कैंसर मिला। बुजुर्ग का मुंह खुलना भी कम हो गया था।

प्राचार्य ने डॉ. आशीष, डॉ. पारुल, प्लास्टिक सर्जन डॉ. प्रेम शंकर व एनास्थिसिया की डॉ.यामिनी के साथ मिलकर बुजुर्ग के मुंह के भीतर जटिल प्रकार के कैंसर का ऑपरेशन किया। प्रो. संजय काला ने बताया आपरेशन में पांच घंटे लगे। लेकिन बुजुर्ग अब पूरी तरह स्वस्थ्य है। उसे फाइब्रोमेक्सॉइड सार्कोमा कैंसर हुआ था। जिसके विश्व में अभी तक चार मामले सामने आए हैं। यह देशका पहला और दुनिया का पांचवां मामला है।
 
काटना पड़ा मुंह के नीचे का हिस्सा 

प्रो. संजय काला ने बताया कि यह केस कमांडो सर्जरी का था। कैंसर की वजह से बुजुर्ग के दांत सड़कर निकल चुके थे। कैंसर मुंह के पूरे हिस्से को प्रभावित न कर सके इसलिए ऑपरेशन में बुजुर्ग के मुंह के नीचे का हिस्सा काटना पड़ा। इसके बाद उनकी छाती के मांस का हिस्सा प्लास्टिक सर्जरी के माध्यम से लगाया गया।

निकाले नहीं जाने पर बार-बार फैल जाता है

मरीज ने दो बार जांच कराई थी, लेकिन सही बीमारी का पता नहीं चल रहा था। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पैथोलॉजी विभाग की डॉ.चयनिका काला ने आधुनिक मशीन से जांच की तो दुर्लभ ट्यूमर (फाइब्रोमेक्सॉइड सार्कोमा) का पता चला। यह ट्यूमर न निकाला जाए तो बार-बार हो जाता है। इसलिए मरीज का ऑपरेशन कर गांठ के साथ जबड़ा भी निकालना पड़ा। डॉ. प्रेम शंकर ने प्लास्टिक सर्जरी कर जबड़ा बनाया।

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