बरेली: हिंदी का ढिंढोरा पीट रहे रुविवि में हिंदी विभाग ही नहीं

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

पीयूष दुबे, बरेली। राजभाषा हिंदी… देश की संस्कृति हिंदी, मातृ भाषा हिंदी। ऐसे कई नामों से अंलकृत हिंदी की दुर्दशा का अनुमान इस बात से सहज ही लगाया जा सकता है कि महात्मा ज्योतिबा फुले (एमजेपी) रुहेलखंड विश्वविद्यालय में अब तक हिंदी विभाग की स्थापना नहीं हो सकी है। हो सकता है कि आपको यह …

पीयूष दुबे, बरेली। राजभाषा हिंदी… देश की संस्कृति हिंदी, मातृ भाषा हिंदी। ऐसे कई नामों से अंलकृत हिंदी की दुर्दशा का अनुमान इस बात से सहज ही लगाया जा सकता है कि महात्मा ज्योतिबा फुले (एमजेपी) रुहेलखंड विश्वविद्यालय में अब तक हिंदी विभाग की स्थापना नहीं हो सकी है।

हो सकता है कि आपको यह खबर हैरान करे, लेकिन यह कटु सत्य है। खास बात यह है कि हिंदी विभाग खोले जाने को लेकर बरेली कॉलेज के कुछ प्रोफेसर एवं हिंदी के विद्वान विश्वविद्यालय परिसर में हिंदी विभाग खोले जाने की मांग भी कर चुके हैं लेकिन अब तक इस पर कोई काम नहीं हो सका।

रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिसर में 25 विभाग संचालित हो रहे हैं, जिनमें 22 विभागों के विभागाध्यक्ष भी हैं। अब नए विभाग खोलने के प्रयास भी रुविवि प्रशासन की ओर से किए जा रहे हैं लेकिन उन विषयों से संबंधित विभाग खोलने पर जोर दिया जा रहा है, जिनसे विश्वविद्यालय की आय बढ़े। हालांकि इसके साथ ही हिंदी विभाग को खोलने का प्रस्ताव भी है लेकिन यह धरातल पर कब होगा। इस बारे में विश्वविद्यालय प्रशासन के पास स्पष्ट जवाब नहीं है।

रुविवि से संबद्ध 548 कॉलेजों में 29 सरकारी सहायता प्राप्त और 31 राजकीय डिग्री कॉलेज हैं, जबकि बाकी महाविद्यालय स्ववित्तपोषित हैं। अब बरेली कॉलेज समेत ऐसे कुछ विद्यालय भी हैं, जहां हिंदी विभाग है लेकिन विश्वविद्यालय में अब तक स्थापित नहीं किया गया। ऐसे में हिंदी को बढ़ावा कैसे दिया जा सकता है?

इस बारे में रुविवि की एक प्रशासनिक अधिकारी का कहना है कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन पत्राचार आदि कार्य हिंदी में ही कराता है। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए कुछ कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। हिंदी विभाग की स्थापना को लेकर सवाल करने पर बताया कि परंपरागत कोर्स में विद्यार्थियों की रुचि कम रहती है।

यह सच है कि अब तक रुहेलखंड विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग नहीं खोला जा सका। रुविवि परिसर में कुछ विभाग खोले जाने के लिए प्रस्तावित हैं, उनमें से एक हिंदी विभाग भी हैं। संभावना है हिंदी विभाग भी आगे आने वाले समय में खोला जाएगा। -डा. अमित कुमार सिंह, मीडिया प्रभारी, रुविवि

संबंधित समाचार