बरेली: एक नाम से दो-दो संपत्तियां सिरदर्द, राजस्व निरीक्षक और टीसी का वेतन रोका

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। नगर निगम के टैक्स विभाग में अफसर और क्लर्क का गठजोड़ टीसी और राजस्व निरीक्षकों के लिए सिरदर्द बना है। निगम में तीन हजार से ज्यादा आईडी ऐसी हैं जो डुप्लीकेट हैं। यानी एक नाम से दो-दो टैक्स बिल अभिलेखों में दर्ज कर दिए गए हैं।

इनमें से कुछ के बिल जमा हो रहे हैं और कुछ के नहीं। जिनका बिल जमा नहीं हो रहा है उनका बकाया बढ़ता जा रहा है। इस बकाया की वसूली का शासन से दबाव पड़ रहा है। इसकी वजह से मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने सभी राजस्व निरीक्षक और टीसी का अग्रिम आदेशों तक वेतन रोक दिया है।

सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2018 में सर्वे शीट के आधार पर निगम में हजारों की संख्या में आईडी जोड़ी गई थीं। उस समय के कर निर्धारण अधिकारी के पास ही सीटीओ का भी चार्ज था और आईडी जुड़ने में समस्या नहीं आई। इस शीट के जरिए जो आईडी शामिल की गई उसमें फोन नंबर की जगह केवल 1 से 10 तक गिनती लिखी गई है। 

संपत्ति का एरिया भी दर्ज नहीं किया गया है। रकम भी हाथ से दर्ज नहीं की गई। बरसों से डुप्लीकेट आईडी चली आ रही है और इसमें दर्ज रकम भी करोड़ों में बकाया दिख रही है। ऐसा ही केस मांगे लाल का था। जिनकी डबल आईडी में एक में नौ लाख का बकाया चल रहा था जबकि वास्तविक डिमांड 900 रुपये है। शासन ने तो निगम से बढ़ते बकाया की वसूली बढ़ाने को कहा तो पता चला कि कई डुप्लीकेट आईडी बनी हैं। कर समाहर्ताओं का कहना है कि जब से निगम का डाटा दूसरी एजेंसी को गया है तब तब यह घपला करने में आसानी हुई है।

साफ्टवेयर में ऑप्शन है कि जितनी भी बोगस डिमांड बनी है। उनमें कंप्यूटर जनित आईडी पर केवल वार्षिक मूल्यांकन यानी एआरवी आ रही है जबकि वास्तविक एआरवी में संपत्ति की नाप भी आएगी। कई आईडी पर पांच साल से बकाया चल रहा है। अफसरों को वसूली भी चाहिए, फाइल भी पूरी चाहिए और अब डबल आईडी की रिपोर्ट भी मांगी जा रही है। सीटीओ ने डुप्लीकेट आईडी की जांच के लिए अगस्त में सभी राजस्व निरीक्षक और टीसी को पत्र भेजकर कहा था कि डबल डिमांड का परीक्षण कराएं। सितंबर में इसका रिमाइंडर भी भेजा लेकिन किसी ने रिपोर्ट नहीं दी।

डुप्लीकेट आईडी का परीक्षण कराकर उसे निरस्त करने की संस्तुति जोन अधिकारी के माध्यम से रिपोर्ट मांगी गई थी। दो बार समय देने के बाद भी रिपोर्ट नहीं आई है। इसलिए अग्रिम आदेशों तक राजस्व निरीक्षक और कर समाहर्ता का वेतन रोका गया है।-पीके मिश्रा, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी

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