33 करोड़ गोबर के दीयों से मनाई जाएगी राष्ट्रीय कामधेनु दीवाली, गणेश-लक्ष्मी भी होंगे गोबर निर्मित

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अमेठी। गौरीगंज के रहने वाले राष्ट्रीय सैनिक छात्र सेवा परिषद के संस्थापक-अध्यक्ष अंकित शुक्ला ने बताया भारत दुग्ध उत्पादन में विश्व में नंबर एक पर होने के बावजूद प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता के मामले में हम आधे पर हैं। राष्ट्रीय सैनिक छात्र सेवा परिषद ने इस साल पूरे देश की दीवाली को गौ-माता के रंग में रंगने का निर्णय किया है। इसके तहत इस साल दीपावली पर गाय के गोबर से निर्मित दीयों को जलाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। 

राष्ट्रीय सैनिक छात्र सेवा परिषद का लक्ष्य है कि देश के 11 करोड़ परिवारों के माध्यम से इस वर्ष 33 करोड़ गोबर के दीपक जलाए जाएं। इसके लिए लाखों परिवारों के माध्यम से गाय के गोबर से दीपकों का निर्माण किया जा रहा है। इसके पहले संस्था ने गोमय गणेश अभियान की शुरुआत की थी जो काफी सफल रही है। इसी को देखते हुए संस्था अध्यक्ष अंकित शुक्ला ने राष्ट्रीय कामधेनु दीवाली मनाने की योजना बनाई है। अंकित शुक्ला ने बुधवार को इस अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि गायों से जुड़े उत्पादों को संवर्धित कर उन्हें बेचने को प्रोत्साहन देने के लिए संस्था लगातार काम कर रही है।

 इससे देश के गौपालकों के जीवन में भारी परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत दुग्ध उत्पादन में विश्व में नंबर एक पर होने के बावजूद प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता के मामले में हम आधे पर हैं। उन्होंने कहा कि गाय हमारे किसानों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है। बदले समय में बैलों की उपयोगिता कम हो जाने के कारण किसानों को काफी नुकसान हो रहा है, लेकिन अगर गौ-उत्पादों को संवर्धित कर उन्हें उपयोग में लाया जाए तो इससे न सिर्फ वातावरण शुद्ध होगा, बल्कि किसानों की आय में भी बढ़ोत्तरी की जा सकेगी। इस दीपावली का प्रस्ताव इसी योजना को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

 दीपावली के लिए गोबर आधारित दीये, मोमबत्तियां, धूप, अगरबत्तियां, शुभ-लाभ, स्वास्तिक, समरानी, हार्ड बॉर्ड, वाल पीस, पेपर वेट, हवन सामग्री, भगवान गणेश एवं लक्ष्मी की प्रतिमाओं का निर्माण किया जा रहा है। भगवान श्रीराम की पावन जन्मस्थली अयोध्या में तीन लाख दीये प्रज्वलित किए जाएंगे। इसी प्रकार काशी में भी एक लाख दीप प्रज्वलन का कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।

राष्ट्रीय सैनिक छात्र सेवा परिषद कि स्थापना अंकित शुक्ला ने गाय एवं गौवंश की सुरक्षा, संरक्षण, विकास और पशुपालन कार्यक्रम के उचित दिशा में उत्थान को सुनिश्चित करने के लिए की थी जो गोपालन से संबंधित योजनाओं के नीतिनिर्माण एवं क्रियान्वयन को उचित दिशा प्रदान करने के लिए काम करता है। संस्थान ने इससे पहले रक्षाबंधन पर राखियां भी गाय के गोबर से तैयार की थी। 

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