बरेली: आलू के बढ़ते दाम पर सरकार सख्त, जमाखोरों पर होगी कार्रवाई
बरेली, अमृत विचार। सब्जियों में महज प्याज में ही ताकत है जो सरकार की आंखों में आंसू ला सकता है। इन दिनों तो प्याज के साथ-साथ आलू भी रुला रहा है। ऐसे में सरकार का बेचैन होना साफ है। आलू-प्याज के दाम बढ़े तो सरकार ने प्याज के निर्यात पर रोक लगा दी। इसके बाद …
बरेली, अमृत विचार। सब्जियों में महज प्याज में ही ताकत है जो सरकार की आंखों में आंसू ला सकता है। इन दिनों तो प्याज के साथ-साथ आलू भी रुला रहा है। ऐसे में सरकार का बेचैन होना साफ है। आलू-प्याज के दाम बढ़े तो सरकार ने प्याज के निर्यात पर रोक लगा दी।
इसके बाद अब शासन जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने जा रहा है। वजह यह है कि आलू-प्याज के दाम भले ही बढ़ गए हों लेकिन किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।
कोल्ड स्टोरेज मालिक और बड़े व्यापारी इसका फायदा उठा रहे हैं। प्रमुख सचिव बीएल मीणा ने डीएम और जिला उद्यान अधिकारी को आलू की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
लाकडाउन के कारण महीनों तक मोहल्लों की सब्जी मंडियां बंद रही। शहर में महज डेलापीर व नगर निगम मंडी ही खुली। वो भी कुछ घंटों के लिए ही खुलती थीं। इससे सब्जी का कारोबार करने वाले परेशान थे।
कोरोना काल में पहली बार ऐसा हुआ था जब आलू, टमाटर, प्याज, लौकी आदि सब्जियां मंडी लेकर पहुंचे किसानों को लागत से कम कीमत मिली।
इस दौरान बाहर से आवक और कोल्ड स्टोरेज से निकासी न होने से आलू के भाव लगातार बढ़ते चले गए। बाजार में नया आलू फर्रुखाबाद, कन्नौज और पहाड़ी आलू उत्तराखंड से आता है, जबकि पुराना आलू कोल्ड स्टोरेज में बड़े पैमाने पर स्टॉक है। वर्तमान स्थिति यह है कि अनलाक के बाद भी आलू के दाम नीचे नहीं आ रहे हैं।
फुटकर में आलू का भाव 35 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। जबिक प्याज 30 रुपये किलो तक बिक गई। हालांकि प्याज के दाम तो कम हुए हैं लेकिन आलू के भाव कम होते दिखाई नहीं दे रहे हैं।
इसको लेकर प्रमुख सचिव बीएल मीणा ने निर्देश जारी कर आलू के थोक और फुटकर भाव के बीच बढ़ते अंतर पर चिंता जताते हुए कोल्ड स्टोरों से आलू की पर्याप्त निकासी और निगरानी के लिए कहा है।
कृषि विशेषज्ञ वीरेंद्र गंगवार बताते हैं आलू की खुदाई फरवरी-मार्च में होती है। मार्च से आलू का कोल्ड स्टोरेज में भंडारण शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार बारिश की वजह से अच्छा उत्पादन नहीं हुआ। लाकडाउन का भी काफी असर पड़ा है। कुछ अन्य सब्जियों पर भी महंगाई की मार पड़ी है।
कुछ इस तरह होता है जमाखोरी का खेल
जिले में 21 कोल्ड स्टोरों की भंडारण क्षमता एक लाख मीट्रिक टन से अधिक हैं। बताया जाता है काफी किसान कोल्ड स्टोरेज स्वामी और बड़े व्यापारियों को पहले ही आलू भेज देते हैं। वहीं, इस बार आलू का उत्पादन कम हुआ है। कोरोना संक्रमण की वजह से किसानों ने जो आलू कोल्ड स्टोर्स में रखा था उसे बेचना मुनासिब नहीं समझा। अब कोल्ड स्टोरेज से जो आलू निकल रहा है वह किसानों का कम व्यापारियों का ज्यादा है। इसका सीधा असर आलू की कीमतों पर पड़ रहा है।
20 फीसदी आलू बुवाई में कमी का दावा
अफसरों का दावा है पिछले साल आलू की खूब पैदावार हुई थी। ज्यादा पैदावार से वाजिब दाम न मिलने के कारण इस साल आलू की बुवाई में 20 फीसदी तक की कमी आई। बेमौसम बारिश ने आलू उत्पादन पर प्रभाव डाला है। आंकड़ों की मानें तो इस बार सिर्फ 65. 550 मीट्रिक टन आलू भंडारण हुआ है। जबकि भंडारण की क्षमता करीब एक लाख मीट्रिक टन से अधिक है। पिछले साल कोल्ड स्टोरेज में करीब 85 से 90 प्रतिशत भंडारण हुआ था।
प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश का कहना है एक बोरी में 50 किलो आलू होता है। कोल्ड स्टोरेज से निकालने के बाद इसकी छंटनी होती है। इसके आलू की मात्रा घट जाती है। वर्तमान में 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक निकासी हो रही है। यह आलू जब फुटकर दुकानदार पर पहुंचता है तो कीमत तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल पार कर जाती है। इस वजह से गली मोहल्लों की दुकानों पर आलू महंगा बिकता है। फुटकर दुकानदार आलू 35 रुपये किलो तक बेच रहे हैं। ग्राहक इससे अंजान बना है।
