शाहजहांपुर: दिल्ली में पुरानी बसों पर रोक, बीएस-6 श्रेणी की जाएंगी बसें

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Edited By Amrit Vichar
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सरकार ने प्रदूषण को लेकर उठाया, डिपो में मात्र 20 बसें, त्योहार पर होगी दिक्कत

शाहजहांपुर, अमृत विचार। दिल्ली में प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार परिवहन निगम की बीएस-4 की श्रेणी बसों पर एक नवंबर से रोक लगाने जा रही है। अब निगम की बीएस-6 श्रेणी मॉडल की बसें दिल्ली जाएगी। बसों पर रोक लगाए जाने को लेकर दिल्ली से आने वाले यात्रियों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। स्थानीय डिपो में बीएस-6 श्रेणी मात्र 20 बसें है। डिपो की आय पर फर्क पड़ सकता है।

स्थानीय परिवहन निगम डिपो में निगम की 96 बसें और 84 अनुबंधित बसें है। जबकि डिपो से दिल्ली के लिए 30 बसों का संचालन होता है। बीएस-6 श्रेणी की मात्र 20 बसें है और बाकी बसें बीएस-4 श्रेणी की है। दिल्ली जाने वाली कई बसें काफी पुरानी हो चुकी है। काफी संख्या में दिल्ली से लोगों का आना-जाना लगा रहता है।

प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार पुरानी रोडवेज बस बीएस-4 श्रेणी के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने जा रही है। रोडवेज की बसों पर एक नंबर से प्रतिबंध लगेगा। पुरानी बसें दिल्ली में प्रवेश नहीं कर पाएगी। रोडवेज की बीएस-6 श्रेणी की बसें ही दिल्ली जाएगी। बीएस-4 श्रेणी की बसों ने प्रवेश किया तो सीज कर दी जाएगी।

पुरानी बसों के रोक लगाने से दिवाली व छठ पूजा के पर्व पर यात्रियों को परेशानी का सामना कर पड़ता है। क्यों की दिल्ली से काफी संख्या में लोग बसों से आते है। जो बसें बीएस-6 श्रेणी की है, उन बसों में त्योहार के समय पैर रखने की जगह नहीं मिलेगी। डिपो के कर्मचारियों का कहना है कि बीएस-4 श्रेणी बसों पर प्रतिबंध लगाना था तो दिवाली व छठ पूजा के बाद लगाना चाहिए। बसों के रोक लगने से डिपो की आय पर भी फर्क पड़ सकता है।

दिल्ली सरकार प्रदूषण को लेकर पुरानी बसों पर रोक लगाने जा रही है। सिर्फ बीएस-6 श्रेणी की बसें  दिल्ली जाएगी। डिपो के पास मात्र बीस बसें है। मुख्यालय से बीएस-6 श्रेणी बसों की डिमांड की जाएगी---आरएस पांडेय, एआरएम।

पुरानी प्राइवेट बसें दौड़ाई जाती हैं दिल्ली तक
दिल्ली के लिए जो प्राइवेट बसें जाती है, उनमें से कुछ बसें ऐसी भी हैं, जिनके मालिक के पास सवारी का परमिट नहीं है बल्कि पार्टी का परमिट है। रोडवेज बस के निकट, बरेली  मोड़, निगोही रोड से गदियाना के सामने प्राइवेट बसें  दिल्ली के लिए जाती है। जबकि अधिकांश पुरानी बसें है, जो इतना धुआं छोड़ती और इंजन अधिक आवाज करता है, जिससे सवारियों का बैठना मुश्किल हो जाता है। रोडवेज कर्मचारियों ने कहा कि पुरानी प्राइवेट बसों पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए। परमिट के नाम से सवारियां ढो रहे है।

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