ग्रेटर बरेली की राह में अड़चन बनी 6400 वर्ग मीटर में बनी रिजॉर्ट, मालिक ने चुपचाप कंपाउंडिंग फीस जमा कर फंसाया पेच
कोर्ट से स्टे भी ले आया रिजॉर्ट मालिक, बीडीए अफसरों ने खारिज कराने के लिए लगाया पूरा दम
बरेली, अमृत विचार : बीडीए की महत्वाकांक्षी परियोजना ग्रेटर बरेली के लिए प्रस्तावित जमीन पर बनी एक रिजॉर्ट उसकी राह में बड़ा रोड़ा बन गई है। एक रिजॉर्ट मालिक ने उसकी कंपाउंडिंग फीस चुपचाप बीडीए में जमा कर दी। इसी आधार पर कानूनी पेच फंसाकर रिजॉर्ट मालिक ने कोर्ट से स्टे ले लिया है।
बीडीए ने स्टे ऑर्डर के खिलाफ अपील की है। अफसरों ने दावा किया है कि रिजॉर्ट को हर हाल में गिराकर जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। बीसलपुर रोड पर अहिरोला गांव में एक स्कूल के पास लगभग 64 सौ वर्ग मीटर पर रामतारा रिजॉर्ट बना है। जमीन का यह हिस्सा बीडीए की ग्रेटर बरेली परियोजना में भी शामिल है।
रिजॉर्ट के मालिक चंद्रपाल ने काफी समय पहले उसकी कंपाउंडिंग कराने के लिए निर्धारित शुल्क जमा कर बीडीए अफसरों के हाथ बांध दिए हैं। उस दौरान अहिरोला बीडीए के अधिग्रहण में था। बीडीए ने जब चंद्रपाल पर दबाव बनाया तो वह कोर्ट चले गए। इसके बाद बीडीए की परियोजना अदालती प्रक्रिया में फंस गई है।
बताया जा रहा है कि ग्रेटर बरेली के लिए प्रस्तावित बीडीए की सीमा में आने वाले सभी गांवों की लिस्ट में अहिरोला भी शामिल था लेकिन सूची में अहिरोला की जगह अकरोली छपा है। इसी त्रुटि का सहारा लेते हुए चंद्रपाल को कोर्ट से स्टे मिल गया। इसके खिलाफ बीडीए ने अपील की है जिस पर अगले महीने सुनवाई होनी है। अब हालत यह है कि एक तरफ बीडीए के अफसर हर हालत में जमीन का अधिग्रहण करने की कोशिश करने में जुटे हुए हैं, उधर, दूसरा पक्ष उनके तबादले का इंतजार कर रहा है ताकि इसकी रिजॉर्ट पर आंच न आए।
बीडीए के कंपाउंडिंग फीस लौटाने से पहले ही फ्रीज करा दिया खाता: ग्रेटर बरेली परियोजना की प्रस्तावित जमीन पर रिजॉर्ट बने होने और उसकी कंपाउंडिंग की भी फीस जमा होने की जानकारी होने के बाद बीडीए अफसरों ने इस पैसे को उसी खाते में वापस ट्रांसफर कर दिया जिस खाते से उसे बीडीए के खाते में जमा किया गया था, लेकिन चंद्रपाल ने इससे पहले ही अपना वह खाता फ्रीज करा दिया। इस वजह से बीडीए की ओर से भेजी गई रकम उसमें जमा नहीं हो पाई। बीडीए ने अब इसकी जानकारी चंद्रपाल को पत्र भेजकर दी है।
बीडीए ने कोर्ट में अपील की है। अपील पर आदेश आते ही भवन को ध्वस्त करने के साथ जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई की जाएगी। बीडीए हर हाल में जमीन का अधिग्रहण करेगा। उसके किसी टुकड़े को भी नहीं छोड़ा जाएगा। - जोगिंदर सिंह, बीडीए उपाध्यक्ष
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