अमरोहा: पाला गिरने से आलू की फसल को नुकसान, किसान चिंतित
अमरोहा/गजरौला, अमृत विचार। पिछले दिनों से घने कोहरे के कारण आलू की फसल प्रभावित हुई है। पहले लगायी गयी आलू की फसल बाजार भेज दी गई है। पिछार आलू लगाने वालों के लिए परेशानी भरा समय है। किसान कोहरे और ठंड से कांप उठे हैं। मौसम की बदलाव और गिरते तापमान के साथ कोहरे और पाला ने रबी की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव दिखाना शुरू नहीं कर दिया है। सबसे ज्यादा असर दलहनी फसलों के साथ आलू की फसल पर पड़ रहा है। खेतों में लगे आलू के फसल झूलसा रोग से ग्रस्त हो जा रहे हैं। कोहरा घने होने के कारण मधुमक्खियां फसल पर नहीं पहुंच पाती है। जिसके कारण सरसों,मटर आदि के फसलों में परागण ठीक से नहीं हो पाता है। इससे फलियों में दाना कम बनते हैं।
कोहरे से प्रकाश संश्लेषण की क्रिया हो जाती है बाधित
धूप रहने पर रबी फसल के पौधे भूमि में पोषक तत्व व पानी लेकर अपने पतियों तक हवा में कार्बन डाइऑक्साइड और भोजन में कार्बोहाइड्रेट वसा प्रोटीन विटामिन आदि का निर्माण करते हैं। चादर ओढ़े ज्यादा कोहरे से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधा हो बाधित होने लगती है।
कीट व रोग बढ़ने पर उत्पादन पर पड़ता है असर
घने कोहरे और ठंड बढ़ने से फसलों में हल्का पीलापन, कमजोर होने के साथ कीट व रोग बढ़ने पर उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। जिसके कारण सरसों,मटर,अरहर, मूंग मसूर,चना, आलू, गोभी, बैंगन, धनिया समेत कई सब्जियों को नुकसान पहुंचा है। अत्यधिक ठंड के कारण फसल पर कोहरे की बूंद पड़कर बर्फ की तरह जम जा रही है। इससे संवेदना क्रॉप की सेल फट जा रही है। यही कारण है कि ठंड बढ़ने से और कोहरा से फसलों का ग्रोथ रुक जा रहा है। पिछले चार-पांच दिनों से कोहरा और पाला पड़ रहा है। इससे किसानों की चिंता सतानें लगी है।
झुलसा रोग से करें बचाव
कृषि विज्ञान केन्द्र प्रभारी एके मिश्रा ने बताया कि कोहरा और ठंड के कारण आलू के पौधों की पत्ती पर धब्बे आ जाते हैं। आलू के हरे पौधे झूलस जाते हैं। इससे आलू की फसल को नुकसान होता है। आलू के उत्पादन पर इसका असर पड़ता है। स्थानीय किसान इसे झुलसा रोग भी कहते हैं। इस रोग से बचाव के लिए किसानों को मैगजीप दवा का स्प्रे करना चाहिए। यह दवा एक लीटर पानी में दो ग्राम मिलाकर छिड़काव करना है। जिससे आलू की फसल को नुकसान होने से बचाया जा सकता है।
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