पीलीभीत: 14 पायदान लुढ़की नगर पालिका पीलीभीत, प्रदेश में 38वां और देश में 209 वां मिला स्थान

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। स्वच्छता सर्वेक्षण में चार सालों से  लगातार सुधर रही नगरपालिका की रैकिंग वर्ष 2023 में 14 पायदान नीचे पहुंच गई है। गुरुवार को शासन से जारी हुई स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 की रैंकिंग में पीलीभीत नगरपालिका को स्टेट में 38 वां स्थान मिला है। जबकि देश में 209 वें पायदान पर आ गई।

रैंकिंग जारी होने के बाद नगरपालिका के जिम्मेदार साख बचाते दिखाई दे रहे हैं। बस यही कहना है कि इस बार कुछ खामियां रह गई थी। जिन्हें दूर कराने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल शहर में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर, चोक नाले-नालियां, बदहाल सड़कें , टूटी पानी की पाइप लाइन आदि को रैंकिंग गिरने का कारण माना जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से गुरुवार सुबह स्वच्छता सर्वेक्षण की रैकिंग जारी की गई।

जिसमें शहर नगरपालिका को प्रदेश में 38वां जबकि देश में 209 वां स्थान मिला है। जबकि वर्ष 2022 में राज्य में 24वें और देश में 165 वीं रैंक  हासिल की गई थी। मगर इस बार लापरवाही और बदतर व्यवस्था का  असर स्वच्छता सर्वेक्षण में देखने को मिला है। नगरपालिका की ओर से गीले सूखे कूड़े का निस्तारण के लिए बनाए गए एमआरएफ सेंटर को शुरू ही नहीं कराया जा सका।

अस्थाई डलवा घर और कूड़े के ढेर से निजात नहीं मिल सकी। एफएसटीपी, अमृत योजना का शत प्रतिशत क्रियान्वयन न होना समेत कई अन्य अव्यवस्थाएं हावी रही। इसे ही रैकिंग में गिरावट का कारण माना जा रहा है। हालांकि ओडीएफ में कुछ स्थिति ठीक रही। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन में 3.75 फीसदी अंक मिले हैं, जो स्वत: ही हकीकत बयां करने को काफी है।

यह इशारा करता है कि दावे कुछ भी हों, लेकिन शहर में घरों से कूड़ा उठान ठप है। इसके अलावा जीएफसी( गारबेज फ्री सिटी) में कोई स्टार नहीं मिला है। गारबेज सर्वे के दौरान काफी सारी गड़बड़ियां सामने आई थी। जिस वजह से रैकिंग में कोई स्टार नहीं मिला है। आलम यह है कि नगरपालिका हर माह सफाई व्यवस्था पर करीब 65 लाख रुपये खर्च करती है। इसके बावजूद भी व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो सकी।

हर साल सुधरी थी रैंकिंग
स्वच्छता सर्वेक्षण में नगरपालिका पीलीभीत की स्थिति हर वर्ष सुधरती गई। वर्ष 2019 में जब स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम ने शहर का सर्वे किया था। उस दौरान 362 वां स्थान प्राप्त किया था। वहीं वर्ष 2020 में 259 वां और वर्ष 2021 में 188 वां स्थान प्राप्त किया। इसी तरह हर साल फीडबैक के आधार पर पालिका की स्थिति में बदलाव हुआ है। लेकिन इस बार सर्वेक्षण की रैंकिंग गड़बड़ा गई। 2023 में 38 वां स्थान मिला है। जबकि देश में 209 वें स्थान पर रही है।

चौराहों ने लाया था उछाल, अब पड़े बदहाल
बता दें कि बीते सालों में स्वच्छता रैंकिंग को बेहतर बनाने में शहर के सौंदर्यीकरण कराए गए चौराहे काफी बेहतर साबित हुए थे। तत्कालीन पुलकित खरे ने खुद गंभीरता से लेते हुए  चौराहों को सुंदर कराया था। मगर उनके स्थानांतरण के बाद ही चौराहों पर कराए गए काम को बरकरार रखने में भी जिम्मेदार संजीदा नहीं दिखे। नगर पालिका स्तर से कई बार  जिम्मेदारों ने सुधार कराने की बात कही लेकिन धरातल पर काम नहीं हो सका। टनकपुर हाईवे पर कई जगह मिट्टी के ढेर और कूड़ा कचरा जमा हो रहा है।

शहर में नहीं कूड़ेदान, नाले नालियां में कचरा
शहर को स्वच्छ बनाने का दावा करने वाली नगरपालिका की ओर से शहर में अधिकांश जगह कूड़ेदान नहीं लगवाए गए हैं। बाजार में भी सफाई व्यवस्था बदतर पड़ी है। कूड़ेदान न होने की वजह से अधिकतर  लोग पॉलिथीन आदि कचरा नाले नालियों में डाल देते हैं। जिस वजह से वह चोक  हैं। व्यापारियों का कहना है कि यह सफाई चंद स्थानों तक सीमित है। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि शहर में कहीं भी कूड़ेदान नहीं हैं। कूड़ा उठान की व्यवस्था भी लचर बनी हुई है।

देवहा और खकरा में गिर रहा नालों का गंदा पानी
शहर से निकलने वाली नदियों को स्वच्छ करने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट शुरू किया गया था। जिसको लेकर पूर्व में खकरा के पास वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनवाया गया था जिससे मात्र एक नाले को ही जोड़ा गया है।जबकि अन्य नालों का गंदा पानी आज भी खकरा और देवहा नदी में बेरोकटोक डाला जा रहा है। जो नदियों को  दूषित कर रहा है।

अमृत योजना भी धड़ाम, नहीं पहुंच रहा पानी
शहर में घर-घर पानी पहुंचाने के  लिए अमृत योजना की शुरुआत कराई गई थी। जिसके माध्यम से 65 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन और ओवरहैड टैंक बनवाए गए थे। लेकिन सिस्टम की लापरवाही के चलते अमृत योजना धड़ाम हो गई।  पाइप लाइन लीकेज हो रही है। जिस वजह से घरों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इसके अलावा पाइप  लाइन ठीक करने के नाम पर जगह-जगह गड्ढे खोल कर छोड़ दिए गए हैं। जो हादसे का सबब बन रहे हैं।

यह बात सही है कि इस बार रैंकिंग गिरी है। एमआरएफ सेंटर, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का संचालन ना होना आदि वजह रहा है। यह कार्य मेरे कार्यकाल के नहीं थे।  सेंटर बना दिए गए थे। मगर इनके संचालन की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई थी। अब उन्हें संचालित करने की प्रक्रिया शुरु कर दी गई है। सफाई व्यवस्था का सुधार कराया जा रहा है।  
- डॉ. आस्था अग्रवाल, चेयरमैन नगरपालिका

 

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