पीलीभीत: आखिर 11 दिन बाद पिंजड़े में कैद हुई दहशत का पर्याय बनी बाघिन

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Published By Vishal Singh
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वन विभाग और ग्रामीणों ने ली राहत की सांस, कैद बाघिन को पीटीआर मुख्यालय ले जाया गया

पीलीभीत, अमृत विचार। शहर समेत आसपास के रिहायशी इलाकों में घूमकर दहशत फैलाने वाली बाघिन आखिरकार 11 दिन बाद रविवार दोपहर पिंजड़े में कैद हो गई। बाघिन को वाहन में लादकर पीटीआर मुख्यालय लाया गया। कैद बाघिन को देखने के लिए भारी भीड़ जमा हो गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वनकर्मियों एवं पुलिसकर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

कलीनगर क्षेत्र के गांव अटकोना से 26 दिसंबर 2023 को रेस्क्यू की बाघिन के गले में रेडियो कॉलर लगाकर टाइगर रिजर्व के जंगल में छोड़ा गया था। कुछ दिन बाद ही बाघिन ने दोबारा रिहायशी इलाकों में दस्तक देनी शुरू कर दी। शहर समेत आसपास के गांवों में दस्तक देने के बाद बाघिन ने  नगर पंचायत पकड़िया नौगवा की आबादी के समीप देवहा नदी की डबरी में डेरा डाल दिया था। बाघिन के दोबारा जंगल से बाहर निकलने पर शासन ने बाघिन को दोबारा रेक्स्यू करने की अनुमति दी। 

बाघिन के लगातार नदी नालों के किनारे डेरा डालने से रेस्क्यू करने में आ रही बाधाओं को देखते हुए वन अफसरों ने बाघिन को पिंजड़े में कैद करने का फैसला लगाया गया। पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल की देखरेख में 17 जनवरी को नगर पंचायत की आबादी से 150 मीटर दूरी डबरी में पिंजड़ा लगाया गया। 

उसी रात ने बाघिन ने पिंजड़े के बाहर बंधी बकरी समेत एक पालतू को निवाला बना डाला था। तबसे बाघिन पिंजड़े के इर्द-गिर्द ही घूम रही थी। बाघिन की लगातार चहलकदमी से आसपास के गांवों में खासी दहशत देखी जा रही है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व और सामाजिक वानिकी प्रभाग की संयुक्त निगरानी टीमें लगातार बाघिन की मॉनीटरिंग कर रही थी। इधर रविवार दोपहर करीब 12.50 बजे निगरानी टीम में जब बाघिन की लोकेशन जानने मौके पर पहुंची तो उन्हें पिंजड़ा बंद मिला। 

टीम दोबारा रेस्क्यू व्हीकल पर सवार होकर मौके पर पहुंची और पिंजड़े के भीतर झांककर देखा तो बाघिन पिंजड़े के भीतर मिली। निगरानी टीम ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी। डब्ल्यूटीआई की टीम भी मौके पर पहुंच गई। सूचना मिलने ही वन अफसरों और पुलिस के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। जानकारी मिलते कैइ बाघिन को देखने के लिए भारी भीड़ जमा होने लगी। भीड़ का नियंत्रित करने के लिए वनकर्मियों एवं पुलिसकर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। पिंजड़े को काले तिरपाल से पिंजड़े को ढांककर बंद कर दिया गया। 

पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल एवं सामाजिक वानिकी प्रभाग के डीएफओ आरके सिंह भी मौके पर पहुंचे। करीब 2.10 घंटे तक चली प्रक्रिया के बाद पिंजड़े को एक वाहन में लादकर पीटीआर मुख्यालय ले जाया गया।सूत्रों की मानें तो बाघिन के दोबारा जंगल से बाहर आने के बाद अब उसे जंगल में न छोड़कर कहीं अन्य भेजे जाने की योजना बनाई जा रही है। इसका फैसला उच्चाधिकारियों द्वारा लिया जाना है। इधर 11 दिन से आंतक मचा रही बाघिन के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों समेत वन महकमे ने राहत की सांस ली है।

पीटीआर से निकली एक बाघिन का आबादी में लगातार मूवमेंट देखा जा रहा था। उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद एनटीसीए की गाइडलाइन का पालन करते हुए बाघिन का रेस्क्यू करने के लिए पिंजड़ा लगाया गया था। रविवार दोपहर बाघिन पिंजड़े में कैद हो गई। बाघिन को सेफ हाउस में ले जाया गया है। बाघिन कहां भेजी जाएगी, इसका निर्णय उच्चाधिकारियों द्वारा लिया जाएगा। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व

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