पीलीभीत: चार करोड़ ज्यादा का प्रस्ताव भेजकर गोलमाल की थी तैयारी, पीडब्ल्यूडी के ईई और सहायक अभियंता पर गिरी गाज

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पीलीभीत, अमृत विचार। मार्ग की मरम्मत को लेकर ओवर एस्टीमेट बनाने समेत कई मामलों में आखिरकार लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता एवं सहायक अभियंता पर गाज गिर ही गई है। शासन ने दोनों अधिकारियों को प्रमुख अभियंता कार्यालय लखनऊ से सम्बद्ध किया है। कार्रवाई को लेकर महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड कार्यालय पिछले कुछ दिन से अपनी कार्यशैली को लेकर खासी चर्चा में है। विभाग द्वारा पिछले माह 30 किमी लंबे पीलीभीत-माधोटांडा मार्ग की मरम्मत को लेकर 24 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। भेजे गए प्रस्ताव को लेकर जब अधिकारियों द्वारा जांच की गई तो सड़क का छह किमी का हिस्सा सही पाया गया। इसे बनाने की कोई जरुरत नहीं पाई गई। 

बताते हैं कि विभाग द्वारा पूरी सड़क को ही खराब बताकर ही 24 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें करीब चार करोड़ रुपए ज्यादा का प्रस्ताव भेजकर करोड़ों का गोलमाल किए जाने की तैयारी जा रही थी, मगर जांच में मामला पकड़ में आ गया। इस मामले में मुख्य अभियंता संजय कुमार तिवारी ने प्रस्ताव भेजने वाले अभियंताओं का जवाब भी तलब किया था। 

बताते हैं कि विभाग के अभियंताओं द्वारा ब्लैक लिस्टेड हुए ठेकेदारों को भी काम दे दिया गया। इसको लेकर विभाग की खासी फजीहत हुई। अभियंताओं द्वारा किया जा फर्जीवाड़ा शासन स्तर पर बैठे अफसरों तक भी पहुंच गया। इधर शासन के उप सचिव राजेश प्रताप सिंह ने अधिशासी अभियंता उदय नारायन और सहायक अभियंता राजीव गंगवार का स्थानांतरण करते हुए प्रमुख अभियंता कार्यालय लखनऊ से सम्बद्ध किया है। शासन द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर महकमे में खासा हड़कंप देखा जा रहा है।

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