बरेली: ईकोकार्डियोग्राफी से होती है पशुओं में हृदयाघात की पहचान, आईवीआरआई में श्रीलंका, नेपाल, मालद्वीव के वैज्ञानिकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार: छोटे पशुओं में हृदयाघात के मामले बढ़ रहे हैं। हृदय की बीमारियों की चपेट में आने वाले पशुओं की मृत्युदर 100 प्रतिशत है। हृदय की बीमारियों की पहचान के लिए होने वाली जांच को ईकोकार्डियोग्राफी कहा जाता है। आईवीआरआई के शल्य चिकित्सा विभाग की ओर से केरल, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र के साथ ही श्रीलंका, मालद्वीव, नेपाल, ओमान के वैज्ञानिकों को ईकोकार्डियोग्राफी संबंधी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

छह दिवसीय प्रशिक्षण की शुरुआत सोमवार को की गई। पाठ्यक्रम निदेशक व आरवीसी के प्रभारी प्रधान वैज्ञानिक डा. अमरपाल ने बताया कि श्वान (कुत्तों) में हृदय बाल्व अनियमित रूप से काम करने लगता है। इसके असंतुलन से हृदय का आकार बढ़ जाता है। हृदय सकुंचन क्षमता घट जाती है जिससे शरीर में खून का प्रवाह कम हो जाता है और श्वानों की मृत्यु हो जाती है।

बिल्लियों में हृदय की दीवार की मोटाई बढ़ जाने से हृदय चैंबर छोटा हो जाता है। ऐसे में शरीर में खून का प्रवाह कम हो जाता है। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण से छोटे पशुओं में हृदय की बीमारियों को समझकर निदान के बारे में बताया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए संस्थान के निदेशक एवं कुलपति डा. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि संसाधन न होने से हृदय की बीमारियों की पहचान नहीं हो पाती और पशुओं की मृत्यु हो जाती है।

बताया कि भारत व दूसरे देशों के प्रशिक्षणार्थियों को फ्रैक्चर मैनेजमेंट, एनेस्थिसिया, स्टेम सेल, यूरोलिथियासिस प्रबन्धन आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। संचालन डा. अभिषेक सक्सेना ने किया। संयुक्त निदेशक कैडराड डा. के.पी. सिंह, वन्य जीव प्राणी उद्यान के प्रभारी डा. अभिजीत पावड़े, डा. रेखा पाठक, डा. रोहित समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

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