बाराबंकी : कम हुआ जलस्तर पर नदी के तेवर कायम, कटान तेज
सूरतगंज, बाराबंकी, अमृत विचार : उतार चढ़ाव के लिए चर्चित सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद घट तो रहा है पर तीन बैराजों से कभी भी पानी छोड़ने की दशा में नदी कब उफना जाए, इसका कोई ठिकाना नहीं। शुक्रवार को दो तहसीलों में अफसर तराई का हाल चाल लेने पहुंचे तो दर्जनों गांवों को नदी के पानी ने घेर रखा है। रास्ते पानी में डूब गए हैं वहीं कटान ने भी तेजी पकड़ ली है।
तेजी से बढ़ते हुए लाल निशान पार कर गई सरयू नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर ही है। हालांकि आठ सेमी ऊपर गई नदी में शुक्रवार को पानी घटने लगा था। बढ़ती नदी के पानी ने तेजी से किनारों पर हमला किया और दर्जनों गांव कुछ ही घंटों में पानी से घिर गए। नदी के स्वभाव से परिचित ग्रामीणों को नदी पर जरा भी भरोसा नहीं। उतार चढ़ाव के बाद ही नदी तेजी से हमला करती है। दूसरी ओर जलस्तर में मामूली गिरावट होने से पानी से घिरे सुंदरनगर गांव वासियों ने कुछ हद तक राहत महसूस की, लेकिन उनकी दुश्वारियां जस की तस हैं। जलस्तर में बढ़ोत्तरी होने से क्षेत्र के हेतमापुर के सुंदरनगर, क्योलीपुरवा, ललपुरवा, बलाईपुर, बेलहरी, बाबापुरवा आदि गांवों को पानी ने घेर रखा है।
सुंदरनगर गांव के कृपाल, मो. आलम, मो. अहमद, राम विजय शुक्ला, सुरेश और चेतराम सहित आठ से दस लोग रात में ही पलायन कर गए। इन लोगों ने बाढ़ राहत केंद्र पर शरण न लेकर तटबंध पर अपना आशियाना बनाया है। इस बीच एसडीएम रामनगर आकांक्षा गुप्ता व तहसीलदार विपुल सिंह ने बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण किया। ग्राम सुंदर नगर मजरे बतनेरा के उत्तरी रास्ते पर बाढ़ का पानी नाला से होते हुए सुंदर नगर के उत्तरी रास्ते पर आ गया है। सुचारू आवागमन दो नावों को तैयार रखा गया है। बताया गया कि मेडिकल टीम द्वारा कैंप स्थापित किया गया है जहां पर आठ रोगियों का उपचार भी किया गया। पशु चिकित्सा टीम द्वारा चार पशुओं का उपचार तथा 52 पशुओं का टीकाकरण किया गया है। एडीएम निरंकार सिंह ने बताया कि नदी में पानी छोड़े जाने की कोई सूचना नहीं है। हालात पर नजर रखी जा रही।
एक करोड़ की बाढ़ सुरक्षा योजना पर उठे सवाल
सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव ने बाढ़ विभाग के करोड़ों रुपये के कटानरोधी कार्यों की पोल खोल दी है। ग्राम तपेसिपाह-कोरिनपुरवा के पास एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से कराए गए पर्कोपाइन, पिचिंग व अन्य सुरक्षा कार्य नदी की धारा के सामने बेअसर नजर आ रहे। तपेसिपाह के पास लगाए गए सीमेंट के खंभे धराशायी हो रहे हैं, जबकि कटान लगातार जारी है। आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद विभाग की योजना कटान रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। उनका कहना है कि जिस सुरक्षा व्यवस्था से गांव और खेती बचाने का दावा किया गया था, वही अब सरयू की तेज धारा के आगे टिक नहीं पा रही है। उधर, कोरिनपुरवा गांव की सुरक्षा के लिए लगाए गए सीमेंट के खंभे भी बढ़ते जलस्तर के कारण पानी में डूबने लगे हैं। फिलहाल यहां कटान पर कुछ हद तक रोक है, लेकिन नदी का लगातार बढ़ता स्तर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहा है।
चौपाल में एसडीएम ने बताए बचाव के उपाय
बाढ़ राहत चौकी सनावां में शुक्रवार को उपजिलाधिकारी अनिल कुमार सरोज की अध्यक्षता में चौपाल हुई। इस दौरान तहसीलदार डॉ. अनुराग ने भी बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। चौपाल में सनावां, कहारनपुरवा, पासिन टेपरा और सिरौलीगुंग समेत संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों को आपदा से बचाव के उपाय बताए गए। तहसीलदार डॉ. अनुराग ने ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों से बाढ़ की स्थिति में तत्काल तहसील बाढ़ कंट्रोल रूम को सूचना देने की अपील की। बाढ़ खंड की सहायक अभियंता साक्षी साहू ने नदी में कटान होने पर तुरंत विभाग या अवर अभियंता को सूचना देने की सलाह दी। एसडीएम ने कहा कि बाढ़ प्रभावित गांवों पर राजस्व प्रशासन की लगातार नजर है और चौपालों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस मौके पर बाढ़ विभाग के अवर अभियंता सौरभ वर्मा, ग्राम प्रधान राम बक्श यादव, रामहेत, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
