शाहजहांपुर: चाइनीज मांझे से पतंगें कम, गले ज्यादा कट रहे

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Published By Moazzam Beg
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शाहजहांपुर, अमृत विचार। चाइनीज मांझे ने पतंगबाजी का मजा ही खराब कर दिया। वैसे भी युवाओं को अब पतंगबाजी के शौक को ग्रहण लग चुका है। किशोर पतंग उड़ाते देखे जा सकते हैं, यह सिर्फ काम चलाऊ शौक भर रह गया है, क्योंकि चाइनीज मांझे ने पेंच लड़ाने का काम भी खत्म कर दिया है। हर तरफ पतंगों के साथ चाइनीज मांझे ही दिखाई पड़ते हैं। 

 छतों पर हर ओर चाइनीज मांझे लटके और इधर-उधर फंसे दिखते हैं। साइकिल और मोटरसाइकिल के पहियों में मांझा लिपटा रहता है, जो वाहनों के चलने में दिक्कत करता है। वहीं, रास्तो चलते लोगों के पैरों में फंस कर वह न सिर्फ पैर, बल्कि जूते-चप्पल भी काट देता है, लेकिन मांझा नहीं टूटता। फंसा मांझा निकालने में हाथ भी कटने लगते हैं। चूंकि चाइनीज मांझा से पेंच लड़ाने में किसी को कोई आनंद ही नहीं मिलता है और किसी के पतंग कटती भी नहीं है, इसलिए कटी पतंगें लूटने वाले भी गलियों में दिखाई नहीं देते और न ही छतों पर वो काटा का शोर सुनाई देता है।

प्रशासन और पुलिस विभाग भले ही चाइनीज मांझा की बिक्री नहीं होने की वकालत कर रहा हो, लेकिन सत्यता यह है कि पतंगों की दुकानों पर धड़ल्ले से चाइनीज मांझा बिकता देखा जा सकता है। 

सवाल यह भी है कि अगर दुकानों पर चाइनीज मांझा नहीं बिक रहा है, तो गली-मोहल्लों, कूड़े के ढेर, छतों पर कहां से आ रहा है। राह चलते प्लास्टिक के महीन तार के रूप में बिक रहे चाइनीज मांझा से लोगों के गले कट रहे हैं। कभी-कभी तो यह मांझा लोगों की जान का दुश्मन भी बन जाता है। आए दिन इस प्रकार की घटनाएं सुनने को मिल जाती हैं कि चाइनीज मांझा से हाथ कट गया और गला कट गया।  

यह सही है कि चाइनीज मांझा जब से आना शुरू हुआ है, तब से पतंगें कम और राह चलते लोगों के गले ज्यादा कटने लगे हैं। राह चलते कब किसके गले में कथित मांझा फंस जाए और उसे अस्पताल की राह पकड़नी पड़ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। हालत यहां तक खराब हो चुकी है कि सुबह कूड़े वाली गाड़ियों में लगभग हर घर से चाइनीज मांझा कूड़े के साथ फेंका जाता है। खुली छतों ओर जीनों यानि सीढ़ियों पर प्रतिबंधित मांझे के रंग-बिरंगे गुच्छे के गुच्छे देखे जा सकते हैं।  

कैप ने बचा ली पंकज तिवारी की जान
भुक्तभोगी पंकज तिवारी बताते हैं कि वह दो दिन पहले अपने हनुमतधाम स्थित आवास स्कूटी से जा रहे थे, कि हनुमतधाम पुल के समीप कुछ बच्चे पतंगें उड़ा रहे थे, तभी अचानक चाइनीज मांझा उनके सिर में फंसता हुआ महसूस हुआ, इससे पहले कि वह कुछ समझ पाते कि मांझा वूलेन मोटी कैप काटता हुआ उनके माथे को चीर गया। उन्होंने आनन-फानन में स्कूटी रोकी और मांझे को हाथों से पकड़ लिया। तब तक मांझा अपना काम कर चुका था।

पंकज तिवारी बताते हैं कि अगर वह कैप नहीं लगाए होते तो उनकी जान भी जा सकती थी। क्यों कि ऊनी कैप भी मांझे ने काट दी और बाद में माथे की स्किन बुरी तरह कट गई। ईश्वर की कृपा से उन्हें नया जीवन मिला है। 

मैंने आज ही कार्यभार संभाला है और आज ही चाइनीज माझे को लेकर ज्ञापन मिला है। चाइनीज मांझे पर लगाम लगाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन चाहेगा कि महानगरवासियों को जल्द ही चीनी मांझे वाली समस्या से निजात मिल जाए।- प्रवेंद्र कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट।

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