ई-रिक्शा चलाकर परिवार को संभाल रही बरेली की ये बेटी, मुश्किल वक्त में बनी अपनों का सहारा
बरेली, अमृत विचार। तू लड़की है घर से बाहर नहीं जाएगी, तू लड़की है जॉब नहीं करेगी। ये बातें आपने खूब सुनी होंगी कि अगर लड़की काम करने के लिए या अकेले घर से बाहर जाने के लिए कहे तो ये डायलॉग जरूर मिलते हैं, लेकिन समय के अनुसार परिवर्तन भी होता है। आज के समय में लड़कियां लड़कों से कम नहीं हैं।
आज के समय की लड़कियां परिवार की देखभाल के साथ साथ आर्थिक सहयोग का सहारा भी बनती हैं, लड़कों से कदम से कदम मिलाकर चलती हैं। एक ऐसी ही बेटी बरेली निवासी है जो अपने परिवार का पालन पोषण ई रिक्शा चलाकर करती है। अपनी पूरी परिवार की जिम्मेदारी स्वयं उठाती है।
हम बात कर रहे हैं थाना बारादरी के चक महमूद में रहने वाली 25 वर्षीय दीपाली की, जिसने अपनी मां और भाभी के बीमार होने पर ई रिक्शा चलाकर अपने परिवार का सहारा बनी हुई है। दीपाली जब छोटी थी, तभी पिता पन्नापाल का निधन हो चुका गया। दीपाली की मां ने उसे व उसकी चार बहनों, एक भाई को पाला। बहनों और एक भाई की शादी दीपाली के ताऊ ने की, लेकिन कुछ समय पहले वो भी गुजर गए। अब आर्थिक समस्या से जूझ रहा परिवार दीपाली संभालने में लगी हुई है। दीपाली का आधा मकान भी बिक चुका है।
रिक्शा चलाकर जो भी बचत होती है उससे मां और भाभी की दवाओं और घर के खान-पान में चला जाता है। दीपाली की पढ़ाई काफी समय पहले ही छुट गई, लेकिन अपने परिवार का सहारा आज भी बनी हुई है।
दीपाली ने परिवार के लिए कहीं जॉब नहीं की क्योंकि उसे छह या सात हजार से ज्यादा रुपए नहीं मिलते, जिससे उसके परिवार का गुजारा हो सके, उसने किसी के आगे हाथ फैलाने से अच्छा रिक्शा चलाना बेहतर समझा और आज अपने परिवार का सहारा बने हुए है। भाई की कमाई से घर चलाना पर्याप्त नहीं था, दीपाली ने आग बढ़कर ई रिक्शा चलाकर अपनों का सहारा बनी। दीपाली का कहना है कि उसकी पढ़ाई काफी समय पहले छुट गई, लेकिन अगर पढ़ाई की होती तो रिक्शा चलना नहीं पड़ता।
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