17वीं लोकसभा... सिर्फ 611 सवालों में सिमट गई बरेली मंडल की तकदीर

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सुरेश पांडेय, बरेली, अमृत विचार। सांसदों की ओर से 17वीं लोकसभा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की संख्या के आधार पर अगर उनकी सक्रियता का आंकलन किया जाए तो धर्मेंद्र कश्यप का प्रदर्शन इस मामले में संतोष गंगवार से ज्यादा बेहतर रहा। 

धर्मेंद्र कश्यप की ओर से 138 सवाल पूछे गए जबकि संतोष गंगवार का यह आंकड़ा सिर्फ नौ सवालों पर आकर ठहर गया। बरेली मंडल में अगर सांसदों का यह रिपोर्ट कार्ड देखा जाए तो वरुण गांधी लोकसभा में सबसे कम उपस्थिति के बावजूद सबसे ज्यादा 206 प्रश्न पूछे।

17वीं लोकसभा में मंडल की पांचों सीटों पर भाजपा के ही सांसद रहे हैं। संसद में उपस्थिति के साथ, बहस में हिस्सा लेने और अपने क्षेत्र के विकास और समस्याओं से संबंधित प्रश्न पूछने के मामले में पांचों सांसदों का प्रदर्शन अलग-अलग रहा है। इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिसी रिसर्च स्टडीज की ओर से तैयार रिपोर्ट के अनुसार कुछ सांसदों ने अपने क्षेत्र के बजाय राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर संसद में ज्यादा सवाल पूछे तो कुछ का फोकस क्षेत्रीय मुद्दों पर रहा।

बरेली के आठ बार सांसद रह चुके संतोष गंगवार ने पांच साल के कार्यकाल में सबसे कम प्रश्न पूछे। हालांकि 17वीं लोकसभा में वह 30 मई 2019 से सात जुलाई 2021 तक यानी करीब तीन साल मंत्री रहे। चूंकि मंत्री सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उनकी भागीदारी रिपोर्ट नहीं होती, यानी वे प्रश्न पूछने वाली श्रेणी में नहीं आते हैं। एक जून 2019 से 10 फरवरी 2024 तक के उपलब्ध डेटा के अनुसार मंत्री पद से हटने के बाद सांसद संतोष गंगवार ने नौ प्रश्न ही पूछे। दो साल में औसत के हिसाब से भी दूसरे सांसदों की तुलना में यह संख्या काफी कम है।

जो मुद्दे उठाए, उन पर बात नहीं बढ़ी आगे
बरेली मंडल के सांसदों की ओर से 17वीं लोकसभा में की गईं ट्रेन के स्टॉपेज, स्टेशन पर एस्केलेटर और लिफ्ट लगाने, खेलो इंडिया सेंटर खोलने,आलू आधारित खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने जैसी मांगे पांच साल में पूरी नहीं हुई। 

एक सांसद की ओर से ने सेना में अपनी बिरादरी की अलग रेजिमेंट बनाने की भी मांग की गई। इसके अलावा मेंथा उद्योग को बढ़ावा देने, विश्वविद्यालय स्थापित करने, चीनी मिल, ट्रॉमा सेंटर खोलने और अपने संसदीय क्षेत्र के ऐतिहासिक स्थानों को पर्यटनस्थल के रूप में विकसित करने जैसी मांगें की भी की गईं। कुछ सांसदों ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के बजाय राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और विदेशी मामलों से संबंधित मुद्दे भी उठाए।

वरुण गांधी
पीलीभीत के सांसद की लोकसभा में सबसे कम 79 प्रतिशत उपस्थिति रही और इस दौरान उन्होंने सिर्फ पांच परिचर्चाओं में ही हिस्सा लिया, लेकिन प्रश्न पूछने में वह सबसे आगे रहे। अपने कार्यकाल में उन्होंने 206 प्रश्न पूछे जो मंडल के बाकी सांसदों की तुलना में सबसे ज्यादा हैं।

संतोष गंगवार
बरेली के सांसद संतोष गंगवार केंद्र सरकार में करीब तीन साल तक मंत्री पद पर रहे। इसके बाद शेष दो साल में बतौर सांसद उन्होंने नौ प्रश्न पूछे और बहुराज्य सहकारी सोसायटी संशोधन विधेयक की बहस में भी सक्रिय भाग लिया। सदन में संतोष गंगवार की उपस्थिति 94 फीसदी रही।

धर्मेंद्र कश्यप
आंवला के सांसद पांच साल के कार्यकाल के दौरान कुल मिलाकर 138 प्रश्न पूछे और सदन में उनकी उपस्थिति 93 फीसदी रही है। हालांकि सदन में होने वाली चर्चाओं में भाग लेने में उन्होंने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। पूरे कार्यकाल में सिर्फ आठ परिचर्चाओं में ही वह शामिल हुए।

अरुण सागर
शाहजहांपुर के सांसद ने पांच साल के कार्यकाल में अलग-अलग मुद्दों पर लोकसभा में हुई 40 परिचर्चाओं में भाग लिया। इसके साथ अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास से संबंधित 172 प्रश्न भी पूछे। पूरे कार्यकाल के दौरान सदन में उनकी उपस्थिति 92 फीसदी रही है।

संघमित्रा
बदायूं की सांसद सदन में सबसे ज्यादा उपस्थिति के साथ सबसे ज्यादा परिचर्चाओं में भी हिस्सा लेने वाली मंडल की सांसद हैं। पूरे कार्यकाल के दौरान सदन में उनकी 98 फीसदी दर्ज है। इसके अलावा उन्होंने 57 परिचर्चाओं में भाग लिया और अपने क्षेत्र के विकास संबंधी 86 प्रश्न भी पूछे।

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