बरेली: नए सत्र में 30 फीसदी महंगी हो गईं निजी प्रकाशकों की किताबें, मनमाने रेट वसूल रहे दुकानदार
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बरेली, अमृत विचार: एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए शैक्षिक सत्र की तैयारियां स्कूलों में शुरू हो गई हैं। नए सत्र में निजी प्रकाशकों की किताबें 30 फीसदी महंगी हो गई हैं। स्कूलों की तय दुकानों पर ही यह किताबें मिल रही हैं। निजी स्कूलों की ओर से अभिभावकों पर निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने का दबाव निरंतर बनाया जा रहा है। दुकानदार किताबों के मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
विभिन्न विषयों की किताब और कापियों पर के रेट में करीब 40 से 90 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। जबकि एनसीईआरटी की किताबें निजी प्रकाशकों की तुलना में पांच गुना सस्ते रेटों पर मिल रही हैं। एनसीईआरटी में 10 वीं और 12वीं की किताबें 15 सौ रुपये में आसानी से मिल रही हैं, जबकि निजी प्रकाशकों की किताबों के लिए अभिभावकों को छह से आठ हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
निजी प्रकाशकों से स्कूल प्रबंधन की सेटिंग
अभिभावक संघ के अध्यक्ष अंकुर सक्सेना ने बताया कि ज्यादातर निजी स्कूल ऐसे हैं, जो हर साल किताबों में परिवर्तन कर नया पाठ्यक्रम लागू करा देते हैं। ऐसे में पुरानी किताबों का उपयोग अभिभावक नहीं कर पाते हैं। वहीं, स्कूल संचालक निजी प्रकाशकों से सेटिंग कर किताबों पर मोटा मुनाफा कमाते हैं। स्कूलों में बच्चों को किताबों के लिए तय दुकानों के नाम की पर्ची भी दी जा रही है। ऐसे में शासन और प्रशासन को कक्षावार, विषयवार किताबों के रेट तय करना चाहिए, ताकि अभिभावकों पर भार न पड़े।
कागज और प्रिंटिंग के रेट बढ़े
नावल्टी चौराहा स्थित स्टेशनरी हाउस के संचालक रवि कुमार ने बताया कि प्रिंटिंग का खर्च बढ़ गया है। साथ ही कागज के दाम भी बढ़ गए हैं। इसलिए कॉपियों के रेटों में इस बार बढ़ोतरी हुई है।
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