बरेली: गंतव्य की पूरी जानकारी होने पर ही बुक हो सकेगा रेलवे टिकट
रजनेश सक्सेना, बरेली। कोरोना संक्रमण की वजह से रेलवे यात्रियों को टिकट बुक कराने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों से डिस्टिनेशन (जिस जगह जाना है) का भी पता पूछा जा रहा है। ऐसे में नई जगह जाने वाले यात्रियों को काफी दिक्कतें हो रही है। क्योंकि उन्हें वहां का पूरा सही …
रजनेश सक्सेना, बरेली। कोरोना संक्रमण की वजह से रेलवे यात्रियों को टिकट बुक कराने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों से डिस्टिनेशन (जिस जगह जाना है) का भी पता पूछा जा रहा है। ऐसे में नई जगह जाने वाले यात्रियों को काफी दिक्कतें हो रही है। क्योंकि उन्हें वहां का पूरा सही पता मालूम ही नहीं है। साथ ही टिकट आरक्षित करने वाले रेलवे कर्मचारियों को भी एक टिकट आरक्षित करने में दोगुना समय लग रहा है।
कोरोना संक्रमण की वजह से सावधानी के तौर पर रेलवे ने टिकट बुक कराते समय यात्रियों से उनका आधार कार्ड या कोई अन्य आईडी प्रूफ लेना शुरू कर दिया है। साथ ही आरक्षण फार्म के पीछे उनसे उस जगह का भी पूरा पता भरने को कहा जाता है, जहां उन्हें जाना है। ऐसे में एक दिन में करीब 70 फीसदी लोग ऐसे आते हैं। जिन्हें अपनी डिस्टिनेशन का पूरा पता नहीं मालूम होता।
अधिकांश लोगों को वहां का पोस्ट ऑफिस और पिनकोड भी नहीं होता है। ऐसे में ये लोग बेहद परेशान हो रहे हैं। रेलवे कर्मचारियों की माने तो अधिकांश लोग ऐसे आते हैं। जिन्हें इंटरनेट भी पूरी जानकारी नहीं होती है। उन्हें नेट से पिनकोड निकालना नहीं आता है। जो लोग शिक्षित है, स्मार्ट फोन का इस्तेमाल अच्छे से जातने है वह खुद ही ऑनलाइन टिकट बुक कर लेते है।
केस 1-
बदायूं रोड के रहने वाले जेके जंक्शन पर अपने बेटे का टिकट बुक कराने के लिए जंक्शन पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके बेटे को लखनऊ जाना है। आरक्षित खिड़की पर बैठे कर्मचारी ने उनसे लखनऊ में जाने वाली जगह का पता पूछा मगर जेके उसे नहीं बता सके। कर्मचारी ने कहा कि नेट से निकाल लो मगर उन्हें इंटरनेट की भी ज्यादा जानकारी नहीं थी। ऐसे में उन्हें और कर्मचारी दोनों को काफी समस्या हुई। काफी देर बाद इधर-उधर से पता करके उन्होंने टिकट बुक कराया।
केस 2-
बाकरगंज के रहने वाले अजय को समस्तीपुर जाना था। अजय से यहां का आधारकार्ड और समस्तीपुर में जाने वाली जगह का पूरा पता पूछा गया। अजय के पास आधारकार्ड तो था मगर उसे समस्तीपुर में जाने वाली जगह का पूरा पता नहीं मालूम था। पिन कोड पूछा गया उसे वह भी नहीं पता था। अजय से कहा कि उसे जितनी जानकारी है वह फार्म में भर दे। मगर वह पूरी तरह से फार्म भी नहीं भर पाया। इधर-उधर से पता करके उसने किसी तरह फार्म भरा इसकी वजह से उसका टिकट भी आरक्षित होने में काफी समय लगा।
केस 3-
कुमार टाकीज के पास बाग ब्रिगटान इलाके के रहने वाले राशिद को इज्जतनगर से सूरत जाना था। वह जंक्शन पर टिकट बुक कराने के लिए पहुंचे थे। मगर जब काउंटर पर उनसे सूरत में जाने वाली जगह का पता पूछा गया तो राशिद को नहीं पता था।
केस 4-
सैटेलाइट के रहने वाले अमिम मौर्य को अमहदाबाद जाना था। मगर उन्हें वहां का पूरा पता नहीं मालूम था। काउंटर पर उनसे अहमदाबाद में जाने वाली जगह का पूरा पता पूछा गया। मगर अमित नहीं बता पाए। उन्हें जिस जगह जाना था उसका पिन कोड भी नहीं पता था। इसकी वजह से टिकट आरक्षित होने में काफी दिक्कतें हुई। उन्हें किसी दूसरी व्यक्ति का सहारा लेकर पूरा पता जानना पड़ा।
यह बात सही है कि लोगों को समस्याएं हो रही है। मगर जब तक रेलवे बोर्ड से कोई आदेश नहीं मिलता है। इसको बंद भी नहीं किया जा सकता। यह डाटा लोकल प्रशासन को देने के लिए इक्टठा किया जाता है। -अभिषेक भाल, एसीएम मुरादाबाद मंडल
