बढ़ती बिजली की मांग

बढ़ती बिजली की मांग

भारत वृद्धि और विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे में कोयला क्षेत्र देश की प्रगति, आर्थिक समृद्धि, रोजगार सृजन और सामाजिक कल्याण की आधारशिला बना हुआ है। साथ ही विद्युत क्षेत्र की आधारशिला के रूप में कोयला हमारी प्राथमिक ऊर्जा आवश्यकताओं में आधे से अधिक योगदान देता है और उद्योगों की रीढ़ के रूप में कार्य करता है। 

पिछले दशक में, मुख्य रूप से कोयले से चलने वाली ताप विद्युत परियोजनाओं ने लगातार देश के कुल बिजली उत्पादन का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्से का योगदान दिया है। बिजली की मांग में भारी वृद्धि के कारण ताप विद्युत पर निरंतर निर्भरता की आवश्यकता होती है। गर्मी बढ़ने और लू चलने के साथ मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर बिजली की मांग बढ़ी है। 

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि मई में गर्मी बढ़ने के कारण बिजली की मांग और बढ़ेगी। राहत की बात है कि सरकार ने तत्परता दिखाते हुए बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मानसून से पहले सभी ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करने की व्यापक योजना बनाई है।

क्योंकि बिजली की औद्योगिक मांग में बढ़ोतरी के बीच, इस बात के संकेत हैं कि बिजली उत्पादन के लिए भारत का कोयला भंडार आदर्श स्तर से नीचे है। कोयले के स्टॉक में गिरावट किसी चुनौती से कम नहीं है। उधर सरकार का दावा है कि हाल ही में कोयला, बिजली तथा रेलवे की अंतर-मंत्रालयी समिति के स्तर पर राज्य बिजली उत्पादक कंपनियों के साथ उप-समूह की बैठक में पाया गया कि देश के सभी ताप विद्युत संयंत्रों (टीपीपी) में कोयले का पर्याप्त भंडार है। 

कोयले की बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त परिवहन व्यवस्था मौजूद है। ‘पिट-हेड’ (खनन गड्ढे) पर मौजूद और टीपीपी को भेजे जा रहे कोयले का कुल भंडारण इस वर्ष 15 मई को 14.7 करोड़ टन था जो सालाना आधार पर 25 प्रतिशत अधिक है। ताप विद्युत उत्पादन 8.78 प्रतिशत और कोयला आपूर्ति 8.45 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। 

कोयला मंत्रालय के मुताबिक इस वर्ष कोयले का उत्पादन पिछले साल की तुलना में 7.26 प्रतिशत बढ़ रहा है। सरकार के मुताबिक पांच ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की पूर्ति के रास्ते में कोयला सेक्टर का बड़ा योगदान रहने वाला है। आमतौर पर कोयला खानों के पास स्थित संयंत्रों में शुष्क ईंधन स्टॉक की स्थिति गंभीर नहीं होती है। 

वहीं जो संयंत्र कोयला खानों के पास नहीं हैं, उनके लिए कोयला दूरदराज से पहुंचाना पड़ता है।  इसलिए कोयला आपूर्ति के लिए रेलवे को नियमित आधार पर कोयला परिवहन के लिए प्रतिदिन अतिरिक्त रैक उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

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