नैनीताल: अतिक्रमित वन भूमि मुनि चिदानंद के कब्जे से मुक्त, निचली अदालत में चलेगा मामला

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नैनीताल। उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित बीरपुर खुर्द गांव में आरक्षित वन भूमि पर अतिक्रमण के मामले में आरोपी मुनि चिदानंद पर मामला अब निचली अदालत में चलाया जायेगा और मुआवजा का मामला भी अब वहीं तय होगा। उच्च न्यायालय ने बाजार दर पर मुआवजा वसूलने की मांग को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही …

नैनीताल। उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित बीरपुर खुर्द गांव में आरक्षित वन भूमि पर अतिक्रमण के मामले में आरोपी मुनि चिदानंद पर मामला अब निचली अदालत में चलाया जायेगा और मुआवजा का मामला भी अब वहीं तय होगा। उच्च न्यायालय ने बाजार दर पर मुआवजा वसूलने की मांग को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने जनहित याचिका को पूरी तरह से निस्तारित कर दिया है।

मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ की अगुवाई वाली युगलपीठ में हुई। आज सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि अतिक्रमित भूमि को कब्जामुक्त कर दिया गया है। अतिक्रमण पूरी तरह से हटा लिया गया है। आरोपी मुनि चिदानंद पर अतिक्रमण के मामले में वन अधिनियम, 1927 की सुसंगत धाराओं के तहत अभियोज पंजीकृत कर लिया गया है। इस मामले में आरोप पत्र भी दाखिल हो गया है।

इसी क्रम में याचिकाकर्ता अर्चना शुक्ला की ओर से अदालत को बताया गया कि मुनि चिदानंद द्वारा आरक्षित वन भूमि पर 20 वर्ष पहले अतिक्रमण कर लिया गया था और इसलिये उनसे बाजार दर पर मुआवजा वसूला जाना चाहिए। दूसरी ओर प्रतिवादी की ओर से अदालत को बताया गया कि अतिक्रमण को लेकर निचली अदालत में मामला चल रहा है। मुआवजा का निर्धारण भी निचली अदालत पर छोड़ दिया जाना चाहिए। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता की मुआवजा की मांग को खारिज करते हुए याचिका को पूरी तरह से निस्तारित कर दिया।

इससे पहले अदालत की ओर से सरकार को तीन माह के अंदर अतिक्रमण हटाने के आदेश दिये गये थे। याचिकाकर्ता की ओर से पिछले साल याचिका दायर कर कहा गया था कि मुनि चिदानंद की ओर से बीरपुर खुर्द गांव में 35 बीघा आरक्षित वन भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। गौ, गुरूकुल एवं गंगा के नाम पर वन भूमि पर कब्जा किया गया है। अतिक्रमित भूमि पर बड़े-बड़े भवन एवं गौशालायें बनायी गयी हैं।

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