लखनऊ : रिश्तेदार चला रहे थे जीएसटी चोरी का गिरोह, पांच गिरफ्तार

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100 से अधिक कंपनियों के फर्जी इनवाइस और ई-वे बिल पर करोड़ों की जीएसटी चोरी

रिश्तेदार चला रहे थे जीएसटी चोरी का गिरोह, पांच गिरफ्तार, एसटीएफ ने करोड़ों की जीएसटी चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश

 लखनऊ, अमृत विचार : एसटीएफ ने फर्जी इनवाइस और ई-वे बिल पर करोड़ों की जीएसटी चोरी करने वलो गिरोह का खुलासा किया है। इस गिरोह के पांच सदस्यों को कैपेगोड़ा नगर बंगलुरू (कनार्टक) गिरफ्तार किया है। पकड़े गये सभी आरोपी रिश्तेदार है। गिरोह के दो सरगना की तलाश की जा रही है। एसटीएफ ने मुजफ्फरनगर में दर्ज 45 करोड़ की जीएसटी चोरी के मामले में कार्रवाई की। आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर मुजफ्फरनगर लाया गया है।

अपर पुलिस अधीक्षक एसटीएफ बृजेश कुमार सिंह के मुताबिक पकड़े गये आरोपियों में राजस्थान के बाडमेर स्थित गोलिया गरवा का रतना राम, ओमप्रकाश और उसका भाई हनुमान राम, डाबड का बुद्धराम और उसका भाई संतोष कुमार शामिल है। पांच आपस में रिश्तेदार हैं। आरोपियों के पास से एसटीएफ ने 13 मोबाइल, एक प्रिंटर, विभिन्न कंपनियों की 8 बिल बुक, चार रबड़ की मुहर, एक नंबरिंग मशीन, चार चेक बुक और तीन कार बरामद किया है।

नौकरी के लिए किया आवेदन, आ गई जीएसटी की टीम : एसटीएफ के एएसपी बृजेश कुमार सिंह के मुताबिक मुज्जफरनगर के खतौली निवास अश्वनी गुप्ता ने 2 सितंबर 2024 को साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसमें आरोप था कि उनके पास महिला ने कॉल किया। एयरपोर्ट पर नौकरी लगवाने के नाम पर जरूरी दस्तावेज मांगे। इसके बाद मोबाइल पर आये ओटीपी पूछा। रजिस्ट्रेशन के बाद जाहिद के नाम अकाउंट में 1750 रुपये ट्रांसफर कराये। कुछ दिन बाद अश्वनी गुप्ता के घर पहुंचे जीएसटी विभाग के अफसरों ने बताया कि उनके नाम पर एके ट्रेडर्स नाम से फर्म रजिस्टर्ड है। इस फर्म के नाम पर मार्च 2024 से अब तक 248 करोड़ के बिलों को जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इन पर 45 करोड़ रुपये का टैक्स बन रहा है। इस मामले की विवेचना अपर पुलिस महानिदेशक, कानून व्यवस्था ने एसटीएफ को स्थानांतरित की थी।

लाभूराम और सुरेश है सरगना : एएसपी बृजेश कुमार सिंह के मुताबिक आरोपियों ने पूछताछ में कुबूल किया कि इस गिरोह का सरगना राजस्थान के जालोट स्थित कोटडा निवासी लाभूराम और बाड़मेर का सुरेश है। लोगों से नौकरी लगवाने का लालच देकर उनके कागजात ले लेते थे। किसी फर्जी आईडी पर सिम निकलवाकर उनके नाम पर जीएसटी पोर्टल पर ऑनलाइन फर्जी फर्म रजिस्टर्ड करते थे। जिसका प्रयोग फर्जी ई-वे बिल बनाकर करीब दो साल से करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी कर रहे थे। लाभूराम व सुरेश ने उनको मोबाइल, फर्जी आईडी के सिम, प्रिंटर, चेक बुक, बिल बुक, रबड़ की मोहर, स्टांप दिये थे।

कमीशन काटकर कंपनी के खाते में जमा कराते थे रुपये : पूछताछ में आरोपियों ने कुबूल किया कि जीएसटी बिल के बदले में सुरेश व लाभूराम आरोपियों के तीन हजार रुपये प्रति बिल के हिसाब से भुगतान करते थे। जिस कंपनी के नाम पर बिल काटा जाता था, उस कंपनी से सुरेश व लाभूराम अपनी बनाई गई फर्जी फर्म के बैंक खातों में रुपये लेते थे। 10 से 20 प्रतिशत कमीशन काटकर पैसा कंपनी के बताए किसी अन्य खाते में या नकद वापस कर देते थे। एसटीएफ की टीम लाभूराम और सुरेश को तलाश में दबिश दे रही है।

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