शरीर की मशीन ठंडा करने के लिए ‘कूलैंट’ है पसीना

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Published By Muskan Dixit
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बरसात के मौसम में गर्मी और उमस पसीना निकाल रही है। वातावरण में आर्द्रता का प्रतिशत बढ़ने से हर कोई पसीना-पसीना हो रहा है। चेहरे का पसीना तो बार-बार पोछ सकते हैं, लेकिन उस पसीने का क्या करें जो पीठ से बहकर नीचे की तरह बह रहा है, और बनियान के बाद शर्ट को भिगो रहा है। दरअसल,मौसम के साथ हमारा शरीर भी किसी मशीन की गर्म हो उठता है। जैसे कार के इंजन को ठंडा करने के लिए कूलैंट है, तो लैपटॉप और कंप्यूटर में हीट सक्शन, एग्जॉस्ट फैन लगे हैं। कुछ इसी तर्ज पर शरीर को सेफ लिमिट तक ठंडा रखने के लिए शरीर में मौजूद स्वेट ग्लैंड पसीना पैदा करती हैं। इनके बॉडी टेम्परेचर कंट्रोल करने के लिए एक्टिव होते ही शरीर से पानी की छोटी-छोटी बूंदें पसीने के रूप में बह निकलती है। इनमें अमोनिया, यूरिया, नमक, और चीनी मौजूद होती है। 

रोम छिद्रों से किसी ज्वार  की तरह ऊपर उठता है

हाल में एक शोध अध्ययन के मुताबिक आम धारणा के विपरीत, पसीना हमारी त्वचा से नाजुक बूंदों के रूप में यूं ही नहीं निकलता है, बल्कि, यह हमारे रोम छिद्रों से एक ज्वार की तरह ऊपर उठता है और त्वचा की ऊपरी परत को भिगो देता है। वैज्ञानिकों ने जर्नल ऑफ द रॉयल सोसाइटी इंटरफेस में इस प्रकिया को दिखाया जिसमें पसीना रोम छिद्रों में एक उथला तालाब बनाता है, फिर दूसरों के साथ मिलकर एक सतत परत बनाता है। इससे पता चलता है कि कैसे हम पसीने से अचानक भीग जाते हैं।

पसीने से नई कूलिंग तकनीक बनाने में मिल सकती मदद

अमेरिका की पब्लिक रिसर्च एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के थर्मल और मैटेरियल इंजीनियर कोनराड रायकाजेव्स्की के अनुसार पसीना ‘घिनौना’ माना जाता है, लेकिन यह बेहद जरूरी है। नमी अपने आप हमें ठंडक नहीं पहुंचाती। पसीने का वाष्पीकरण ही हमारी त्वचा ठंडा करता है। पसीने की क्रियाविधि का अध्ययन करने से वैज्ञानिकों को बेहतर शीतलन तकनीक विकसित करने में मदद मिल सकती है। पसीने पर किए गए पिछले अध्ययनों में इसे सूक्ष्म स्तर पर देखा गया, जिसमें छिद्रों में पसीने के बनते देखने के लिए प्रकाश और इमेजिंग के उपयोग से पाया गया था कि नम त्वचा अधिक विद्युत का संचालन करती है।

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