'डिजिटल दुनिया में भरोसे और सुरक्षा'... देश में पहली बार होगी चर्चा, ये हो सकते हैं बदलाव

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Published By Muskan Dixit
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नई दिल्ली। डिजिटलीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच देश में पहली बार डिजिटल दुनिया में भरोसे और सुरक्षा पर चर्चा होगा जिसमें सरकार, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, ओटीटी और नियामकों समेत सभी संबद्ध पक्षों के दिग्गज स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कानूनों और सुरक्षा उपायों पर विचार-विमर्श करेंगे। गैर-लाभकारी संगठन काउंसिल फॉर सोशल रिसर्च (सीएसआर) दिल्ली में सात और आठ अक्टूबर को ट्रस्ट एंड सेफ्टी फेस्टिवल के साथ मिलकर एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन कर रहा है। 

आयोजन के बारे में मीडिया से बात करते हुए सीएसआर की निदेशक रंजना कुमारी ने कहा कि अब इस बात का समय चला गया है कि एआई अच्छा है या बुरा। यह सच्चाई है कि एआई है और हमें खुद को उसके हिसाब से तैयार करना चाहिये। उन्होंने कहा कि विदेशों में यह तय है कि बच्चे किस उम्र सीमा के बाद ऑनलाइन वेबसाइटों और प्लेटफॉर्मों का इस्तेमाल कर सकते हैं। हमें अपने देश की संस्कृति, समाज और परंपराओं को देखते हुए अपना कानून बनाना चाहिये। उन्होंने स्वीकार किया कि बच्चों को स्कूल में भी एआई के इस्तेमाल में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया जा सकता है।

रंजना कुमारी ने कहा कि वह पूरी तरह से किसी प्लेटफॉर्म को बैन करने का समर्थन नहीं करती हैं लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अश्लीलता के बीच एक रेखा तय करने की जरूरत है। यदि किसी को लगता है कि उसके कंटेंट को गलत तरीके से बैन किया गया है तो उसकी समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया जाना चाहिये। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि जो प्रौद्योगिकी जिस आयु वर्ग के लोगों के अनुरूप है उन्हें उसी के इस्तेमाल की अनुमति दी जानी चाहिये। उन्होंने कहा कि समिट में जो भी सुझाव सामने आयेंगे वे सरकार को भी सौंपे जायेंगे। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि अब डिजिटल माध्यम स्थानीय न रहकर वैश्विक हो गये हैं और इस लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर सभी हितधारकों को एक साथ आने की जरूरत है। 

ट्रस्ट एंड सेफ्टी फेस्टिवल के सह-संस्थापक जीन क्रिस्टॉफ ने कहा कि हमारे सामने एक तरफ ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण है जिसने अश्लील कंटेंट पर पूरी तरह से रोक लगा दिया है तो दूसरी तरफ अमेरिका में अभिव्यक्ति की आजादी की बात कहकर किसी तरह के कंटेंट पर कोई रोक नहीं है। भारत को भी यह खुद तय करना है कि वह किस तरह का कानून चाहता है। इस समिट को अगले साल केंद्र सरकार द्वारा आयोजित होने वाले एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के लिए जमीन तैयार करने वाला कार्यक्रम माना जा रहा है। 

सीएसआर की ऑनलाइन सेफ्टी एवं आरोग्य की प्रमुख ज्योति वढ़ेरा ने बताया कि इसमें मेटा, स्नैपचैट, यूट्यूब, ट्रूकॉलर, यूएन वीमिन और कनाडा, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस तथा स्वीडन के उच्चायोग और दूतावासों के प्रतिनिधि भी विभिन्न पैनल चर्चाओं और कार्यशालाओं में हिस्सा लेंगे। कुल 15 देशों के 200 से अधिक प्रतिनिधियों के समिट में शामिल होने की उम्मीद है। 

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