UP News: मांगें न मानीं तो 20 जनवरी को विधानभवन पर होगा प्रदर्शन, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने ही चेतावनी
लखनऊ, अमृत विचार: राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने रविवार को गोमती नगर स्थित एक होटल में मीडिया के साथ चाय पर चर्चा कार्यक्रम किया। इसमें संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी ने कर्मचारियों के उत्पीड़न और बढ़ते उत्तरदायित्व पर चर्चा की।
आरोप लगाया कि एक वर्ष से मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव कार्मिक के स्तर पर संवाद हीनता बनी हुई है, जिसके कारण विभागों के अधिकारी भी संगठनों के साथ वार्ता नहीं कर रहे हैं। विभिन्न विभागों में लाखों की संख्या में पद रिक्त पड़े हुए हैं जिन पर भर्ती नहीं की जा रही है, जिसके कारण कार्यरत कर्मचारियों पर कार्य का अतिरिक्त दबाव बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों की मनमानी चरम पर है, शासन द्वारा निर्गत अपने ही आदेशों को अधिकारी नहीं मान रहे हैं।
उन्होंने बताया कि समाज कल्याण विभाग में कार्मिक विभाग द्वारा निर्गत शासनादेश में कर्मचारी संगठनों के अध्यक्ष व महामंत्री को विशेष अवकाश एवं बायोमेट्रिक से छूट प्रदान की गई है लेकिन संगठनों के पदाधिकारियों को टारगेट बनाकर उत्पीड़न किया जा रहा है। विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की छंटनी हो रही है। नगरीय परिवहन विभाग में हजारों की संख्या में संविदा चालक परिचालक नौकरी गंवा चुके हैं।
विभागों में पदोन्नति के हजारों पद खाली पड़े हैं परंतु पदोन्नतियां नहीं हो रही हैं। पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल किया जाना, कैशलेस इलाज की सुविधा को सरलीकृत किया जाना, आशा बहू एवं मानदेय पर कार्यरत अन्य कर्मचारियों का समय से मानदेय का भुगतान किया जाना, परिवहन निगम में निजीकरण को बढ़ावा दिया जाना, डग्गामारी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया जाना सहित कर्मचारियों की दर्जनों समस्याएं लंबित पड़ी हुई हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजकर 7 नवम्बर तक कर्मचारियों की मांगों का निस्तारण करने का अनुरोध किया गया है। यदि 7 नवम्बर तक मुख्य सचिव के स्तर से कार्यवाही नहीं होती है तो 8 नवम्बर से मंडल स्तर पर सम्मेलन गोष्ठियां एवं प्रेस वार्ता करके कर्मचारियों के प्रति शासन की उदासीन रवैया से कर्मचारियों को अवगत कराया जाएगा तथा 20 जनवरी 2026 को विधानसभा पर धरना प्रदर्शन के लिए कर्मचारियों को जागरूक किया जाएगा।
