सपा के PDA के मुकाबले भाजपा का नया 'PDA' फॉर्मूला, पिछड़ा, किसान और दलित वोट बैंक पर बड़ा दांव

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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प्रकाश पॉल, देवेंद्र चौधरी और अशोक रावत को प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी देकर भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पिछड़ा, किसान और अनुसूचित वर्ग के बीच जनसंपर्क अभियान तेज किया।

कानपुर l सपा के पीडीए के मुकाबले इन दिनों भाजपा का पीडीए खासी चर्चा में है। सपा का पीडीए जहां जाति और वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है, वहां भाजपा का पीडीए नेताओं के नाम के पहले अक्षर से शुरू होता है l भाजपा ने ''पी'' से प्रकाश पॉल को पिछड़ा वर्ग मोर्चा, ''डी'' से देवेंद्र को किसान मोर्चा और ''ए'' से अशोक रावत को अनुसूचित वर्ग मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर इन तीनों वर्गों के वोटरों को साधने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

भाजपा ने विधानसभा चुनाव के मद्दे नजर प्रकाश पॉल को पिछड़ा वर्ग, देवेंद्र चौधरी को किसानों और अशोक रावत को अनुसूचित जाति के मतदाताओं को पार्टी के पक्ष में जोड़ने की अहम जिम्मेदारी सौंपी है l प्रकाश पॉल गोरखपुर, वृंदावन, अयोध्या, लखनऊ और कानपुर सहित कई जिलों के दौरे कर चुके हैं। इस दौरान वह सपा मुखिया अखिलेश यादव पर खासे हमलावर रहे हैं। उनके भाषण सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं l देवेंद्र चौधरी ने भी दौरे शुरू कर दिए हैं l वह किसानों से संवाद कर उन्हें सरकार की उपलब्धियां बताने के साथ भावी योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं l पूर्वांचल के बाद पश्चिम यूपी का दौरा करके वह जाटलैंड में नाराज किसानों की समस्याओं का समाधान कराकर उन्हें मनाएंगे l उधर, अशोक रावत मिश्रिख से सांसद हैं , अनुसूचित वर्ग में उनकी पैठ है l तीसरी बार सांसद बने हैं l उनके सामने दलित वोटों का रुझान भाजपा की तरफ मोड़ना और खिसके वोटरों को दोबारा जोड़ने की चुनौती है l अब यह एक संयोग ही रहा कि प्रकाश पॉल और अशोक रावत दोनों ही शुक्रवार को कानपुर प्रवास पर रहे l

जय यादव-जय माधव, अबकी बारी बांके बिहारी

पिछड़ा वर्ग अध्यक्ष प्रकाश पॉल ने सपा के यादव वोट में सेंध के लिए नारा दिया है ''जय यादव-जय माधव'' और ''अबकी बारी बांके बिहारी'' l वृंदावन में पदयात्रा और सभा में उन्होंने यादव महासभा के मुखिया को भी अपने साथ खड़ा किया l प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के 55 फीसदी वोटर होने से भाजपा और सपा के बीच इन्हीं वोटों को लेकर घमासान छिड़ा है।

2027 का चुनाव बड़ी चुनौती

सपा ने बीते लोकसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) का नारा दिया था और कांग्रेस से गठबंधन के बीच इन वर्गों के बड़ी संख्या में मिले वोटों की बदौलत प्रदेश में सर्वाधिक सीटें जीती थीं l 2027 के विधान चुनाव में भी इसे नारे के साथ सपा ब्राह्मण सम्मेलन भी आयोजित कर रही है l ऐसे में भाजपा के सामने बड़ी चुनौती लोकसभा चुनाव में छिटके पिछड़े और दलित वोट फिर से अपने पाले में लाने की है l उधर, 2017 के विधानसभा चुनाव की तरह 2027 में भी सपा और कांग्रेस में गठबंधन की कोशिश जारी है l हालांकि 2017 में यह गठबंधन नाकाम साबित हुआ था, लेकिन लोकसभा चुनाव में दोनों दलों को फायदा मिला था।

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