सेबी की चेतावनी : बॉन्ड में निवेश को लेकर रहें सावधान

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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कानपुर। जापान के बॉन्ड मार्केट में जारी उथल-पुथल के बीच बाज़ार नियामक सेबी ने निवेशकों को सतर्क करते हुए चेतावनी जारी की है। बॉन्ड में बढ़ती दिलचस्पी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के तेज़ विस्तार के बीच, बाजार नियामक सेबी ने निवेशकों को अनरजिस्टर्ड ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म्स से सावधान रहने की सलाह दी है।

आर्थिक विशेषज्ञ राजीव सिंह का कहना है कि  प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शहर के निवेशकों का बॉन्ड में क़रीब 5,000 करोड़ रूपये के निवेश होने का अनुमान है। बैंक एफडी के मुकाबले बेहतर ब्याज दरों के कारण आकर्षित होते हैं निवेशक।

बॉन्ड मार्केट में पिछले कई वर्षों में कानपुर समेत उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे लखनऊ, नोएडा गाज़ियाबाद, प्रयागराज, आगरा, वाराणसी, गोरखपुर,  बरेली, झाँसी, मुरादाबाद, अलीगढ़ में रिटेल निवेश तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसी के साथ ग़ैर-पंजीकृत  प्लेटफॉर्म्स की संख्या भी बढ़ रही है, जो निवेशकों के लिए बड़ा जोखिम बनते जा रहे हैं। 
क्या होता है बांड ? 

बॉन्ड एक तरह का ऋण या कर्ज होता है, जिसमें जारीकर्ता (सरकार या कंपनी) निवेशकों से एक निश्चित अवधि के लिए पैसा उधार लेती है। निवेशकों को इसके बदले में एक निश्चित ब्याज दर (कूपन) और परिपक्वता तिथि पर रकम वापस मिलता है। यह शेयर और म्यूच्यूअल फण्ड के विपरीत एक सुरक्षित निवेश माना जाता है क्योंकि यह एक निश्चित आय प्रदान करता है।

भारत में बांड बाजार कितना बड़ा है?

भारत का बॉन्ड मार्केट, जिसमें सरकारी सिक्योरिटीज़, स्टेट डेवलपमेंट लोन और कॉर्पोरेट बॉन्ड शामिल हैं, दिसंबर 2024 तक लगभग ₹226.3 ट्रिलियन था। मौजूदा समय में यह आंकड़ा करीब 250 लाख करोड़ का हो सकता है।भारत का बॉन्ड बाज़ार 10 वर्षों में 25% CAGR की दर से बढ़ा है। निजी क्षेत्र के बॉन्ड जारी करने में भी तेज़ी आई है। 

बाज़ार नियामक सेबी ने निवेशकों को सतर्क करते हुए उन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ चेतावनी जारी की है, जो बिना पंजीकरण के बॉन्ड ट्रेडिंग सेवाएँ उपलब्ध करा रहे हैं। सर्कुलर में कहा गया है कि कई फिनटेक कंपनियाँ और कुछ स्टॉक ब्रोकर ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफ़ॉर्म प्रदाता  की तरह काम कर रहे हैं, जबकि इनके पास स्टॉक एक्सचेंज से अनिवार्य पंजीकरण नहीं है। 

नियमन से बाहर प्लेटफॉर्म, बढ़ सकता है निवेशकों का जोखिम

सर्कुलर में बताया गया है कि ऐसे अनरजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म किसी भी नियामक निगरानी में नहीं आते, न ही इनके पास निवेशक सुरक्षा या शिकायत निवारण का कोई तंत्र मौजूद है। इससे निवेशकों के धन पर जोखिम बढ़ जाता है और विवाद की स्थिति में उन्हें कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती। 

कानूनों के उल्लंघन की आशंका

सेबी ने यह भी कहा है कि इन प्लेटफॉर्म्स की गतिविधियाँ कंपनीज़ ऐक्ट 2013, SEBI ऐक्ट 1992 और संबंधित विनियमों का उल्लंघन कर सकती हैं। नियामक इससे पहले 18 नवंबर 2024 को कुछ संस्थाओं के खिलाफ अंतरिम आदेश भी जारी कर चुका है। 

सिर्फ पंजीकृत ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफ़ॉर्म प्रदाता से ही लेनदेन करें: सेबी

NSE पर 28 वहीं BSE पर 33 कंपनियां के ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफ़ॉर्म प्रदाता रूप में रजिस्टर्ड हैं। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी प्लेटफॉर्म पर बॉन्ड निवेश करने से पहले उसकी पंजीकरण स्थिति की पुष्टि करें और सिर्फ SEBI-रजिस्टर्ड ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफ़ॉर्म प्रदाता (OBPP) पर ही लेनदेन करें। इसके लिए सेबी ने अपने सर्कुलर में तीन लिंक भी साझा किए हैं।

SEBI website: https://www.sebi.gov.in/online-bond-platform-providers.html 
NSE website: https://www.nseindia.com/trade/members-compliance 
BSE website: https://www.bseindia.com/downloads1/OBP_MEMBER_LIST.zip”

मार्केट प्रतिभागियों को भी चेतावनी

सर्कुलर में बाजार के सभी प्रतिभागियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि OBPP जैसी कोई भी सेवा शुरू करने से पहले वे लागू नियमों का पूर्ण अनुपालन करें, अन्यथा कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। 

क्यों चर्चा में आए ये प्लेटफॉर्म?

पिछले कुछ वर्षों में भारत में बॉन्ड बाजार में रिटेल भागीदारी बढ़ी है, और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स ने इसे आसान बनाने के नाम पर बड़ी संख्या में ऐप और वेबसाइट लॉन्च की हैं।

•    कंपनियाँ कम लागत पर बॉन्ड बेचने का दावा करती हैं।
•    WhatsApp/Telegram/YouTube के जरिए प्रचार बढ़ा है।
•    “Bank FD से ज़्यादा रिटर्न” जैसे आकर्षक संदेश देकर निवेशकों को लुभाया जा रहा है।

इसी बढ़ती लोकप्रियता के बीच अनरजिस्टर्ड संस्थाओं की संख्या भी बढ़ी, जिससे निवेशक जोखिम अधिक गहरा हुआ। बॉन्ड बाजार में डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़ने के साथ ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफ़ॉर्म प्रदाता की संख्या भी तेजी से बढ़ी है, लेकिन सेबी की यह सख्ती निवेशकों की सुरक्षा और बाजार की पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफ़ॉर्म प्रदाता चुनते समय SEBI पंजीकरण की जांच करना अब अनिवार्य होना चाहिए यह वैसा ही है जैसे बैंकिंग में RBI लाइसेंस की पुष्टि। बॉन्ड निवेश पिछले कुछ वर्षों में काफी लोकप्रिय हुआ है।

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