आधार कार्ड की तरह खतौनी में दर्ज नाम भी हो सकेगा संशोधित.... किसान सम्मान निधि में आड़े आ रही बड़ी बाधा दूर होने का रास्ता साफ
राजस्व परिषद ने की नयी योजना से करीब तीन करोड़ से अधिक किसानों को लाभ
लखनऊ, अमृत विचार: उत्तर प्रदेश के किसान अब आधार कार्ड के अनुसार अपनी खतौनी में दर्ज नाम को संशोधित करवा सकेंगे। दरअसल, राजस्व परिषद ने राज्य के लगभग तीन करोड़ से अधिक किसानों को सीधा लाभ देने की तैयारी की है। इसके पीछे मंशा किसान सम्मान निधि में आड़े आ रही बड़ी बाधा को दूर करने की है। लंबे वक्त से खतौनी और आधार कार्ड में नाम अलग-अलग होने के कारण से लाखों किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इस स्थिति में प्रभावित किसान संबधित कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर थे।
राजस्व परिषद अब खतौनी को आधार से लिंक करने की प्रक्रिया को तेज करने जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, सबसे बड़ी समस्या यह सामने आई कि बड़ी संख्या में किसानों के दस्तावेजों में नाम अलग-अलग तरीके से लिखा है। नई सुविधा के तहत किसान आधार के अनुसार खतौनी में अपना नाम दर्ज करा सकेंगे, हालांकि इसके लिए संबंधित राजस्व अधिकारी की मंजूरी आवश्यक होगी।
मालूम हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी की है। इस किस्त में 9 करोड़ से ज्यादा किसानों को 2,000 रुपये की राशि (कुल 18 हजार करोड़ रुपये) उनके बैंक खातों में भेजी गई। बावजूद इसके सिस्टम का सॉफ्टवेयर कई किसानों को लेकर वर्तमान में खतौनी को आधार कार्ड से लिंक नहीं कर पा रहा। इसके पीछे सबसे बड़ी समस्या नामों में अंतर की है। कई मामलों में खतौनी में पिता का नाम, स्पेलिंग या सरनेम अलग होने के कारण आधार से मिलान नहीं हो पाता।
नतीजतन, लाखों किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की छह हजार रुपये वार्षिक सहायता राशि से वंचित हो रहे हैं। ऐसे में हर तिमाही दो-दो हजार रुपये की यह किस्त कई किसानों के खाते में नहीं पहुंच पा रही है, क्योंकि सिस्टम नाम मिलान में असफल हो जाता है। अब योगी सरकार की पहल से किसान सम्मान निधि में रोड़ा बन रही बड़ी बाधा दूर होने का रास्ता साफ हो गया है।
राजस्व परिषद ने ऐसे किसानों को राहत देते हुए खतौनी में दर्ज नाम को आधार कार्ड के अनुसार संशोधित करवाने की सुविधा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा, बल्कि किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आने वाली बाधाओं को भी दूर करेगा। इतना ही नहीं फसल बीमा योजना, ऋण माफी, भूमि अधिग्रहण मुआवजा या अन्य कल्याणकारी योजनाओं में भी खतौनी अनिवार्य दस्तावेज होती है। नाम में मामूली अंतर भी आवेदन रद्द होने का कारण बनता है। जिससे किसान परेशान थे अब ऐसा नहीं होगा।
