भारत फिर बनेगा विश्वगुरु: NEP में पहली बार आधिकारिक मान्यता, BBAU में गूंजा भारतीय ज्ञान का स्वर
लखनऊ, अमृत विचार: जो राष्ट्र अपनी मातृभाषा में सोचता है, वही मजबूत राष्ट्र बनता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में देशज भाषाओं को विशेष महत्व दिया गया है, क्योंकि अपनी भाषा में सोचने वाला राष्ट्र ही समग्र उन्नति करता है। उक्त विचार बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के निदेशक डॉ. ओम उपाध्याय ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति पहला ऐसा सरकारी दस्तावेज है, जिसमें भारत को स्पष्ट रूप से ‘विश्वगुरु’ के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
भारतीय ज्ञान परंपरा और वर्तमान संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता विषय पर बोलते हुए कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि भारत एक समय में विश्वगुरु था और वैश्विक जीडीपी का लगभग एक तिहाई हिस्सा अकेले भारत से ही आता था। वह काल भारतीय सभ्यता की उच्चतम ज्ञान-परंपरा, वैज्ञानिक दृष्टि, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक समृद्धि का स्वर्ण युग था, जिसने विश्व को दिशा प्रदान की।
कार्यक्रम में डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, प्रो. शिल्पी वर्मा और रिसर्च एवं डेवलपमेंट सेल के डायरेक्टर प्रो. शिशिर कुमार उपस्थित रहे। मंच संचालन डॉ. शिखा तिवारी ने किया।
