बरेली : कोहरे और पाले से मंडरा रहा फसल बर्बादी का खतरा

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Published By Pradeep Kumar
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रात का पारा 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से वातावरण की नमी जमकर पाले का ले लेती रूप, पौधों की कोशिकाएं हो जाती हैं क्षतिग्रस्त

बरेली, अमृत विचार। जिले में कोहरा और ठंड का असर बना हुआ है। रात के समय पाला गिरना भी शुरू हो गया है। इससे किसानों की आलू, दलहनी और तिलहनी फसलों के खराब होने की आशंका बनने लगी है। मौसम की लगातार ऐसी स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय बन रही है। रात के समय अधिक आर्द्रता के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। हांलाकि कृषि विशेष गेहूं की फसल के लिए यह मौसम अनुकूल बता रहे हैं।

जिला कृषि अधिकारी ऋतुषा तिवारी बताती हैं कि वर्तमान में तापमान में काफी गिरावट हो रही है। रात में न्यूनतम तापमान भी पांच डिग्री सेल्सियस तक आ गया है। इस मौसम में पाला पड़ने की संभावना अधिक बनी रहती है। रात का पारा और गिरने पर वातावरण की नमी जमकर पाले का रूप ले लेती है। इससे पौधों की कोशिकाएं जम जाती हैं और वे क्षतिग्रस्त हो जाती हैं जिससे आलू, सरसों, चना, मटर सहित सब्जी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। पाला गिरने से आलू की पत्तियां झुलसने लगती हैं और कंदों की वृद्धि रुक जाती है, वहीं सरसों समेत अन्य फसल में फूल और फलियों की वृद्धि पर असर पड़ने का डर बना रहता है। पाला लगातार गिरता रहा, तो पूरी लागत और मेहनत के बावजूद किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसे देखते हुए किसानों को सतर्क रहने और समय रहते आवश्यक बचाव उपाय अपनाने की आवश्यकता है। जबकि गेहूं की फसल के लिए यह मौसम अनुकूल है और इसका उत्पादन अपेक्षाकृत अच्छा रहने की संभावना है।

शहर से सटे मुडिया अहमदनगर के प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश बताते हैं कि पाला गिरने से आलू की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। पत्तियों के झुलसने से कंदों की बढ़वार रुक जाती है। इससे उत्पादन घटने का खतरा रहता है। वहीं, सरसों की फसल में फूल और फलियां झड़ने लगती हैं। इससे सीधा असर पैदावार पर पड़ता है। कहा कि अगर पाला लगातार गिरता रहा तो बचाव के तमाम प्रयासों के बावजूद नुकसान से इंकार नहीं किया जा सकता।

पाले से बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान
कृषि और उद्यान विभाग ने पाले से बचाव के लिए एडवाइजरी की है। इसमें किसानों से अपील की गई है कि वह फसलों की हल्की सिंचाई करें, धुआं करें ताकि ठंडी हवा का प्रभाव कम हो सके, मेड़ों पर कूड़ा-कचरा जलाएं, यूरिया उर्वरक के साथ दानेदार सल्फर-7 किग्रा. अथवा जिंक सल्फेट मोनोहाईड्रेट, आठ किलो प्रति एकड़ मात्रा को मिलाकर छिड़काव करें, पाले से तात्कालिक बचाव के लिए सल्फर पाउडर, दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर फसल पर पर्णीय छिड़काव करें, सल्फ्यूरिक एसिड/गंधक का छिड़काव न करें, पौधों के तनों के चारों ओर मिट्टी चढ़ाएं ताकि जड़ें और कंद सुरक्षित रहें, छोटे पौधों को पुआल/सूखी घास से ढकने पर पाले का असर कम होता है, मौसम पूर्वानुमान पर ध्यान दें, पाला चेतावनी मिलने पर पहले से ही बचाव के उपाय करें।

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