इंदौर में दूषित पानी से मौतों पर राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना, उमा भारती ने व्यवस्था पर उठाये सवाल
दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इंदौर में दूषित पानी के कारण कई लोगों की मौत को लेकर शुक्रवार को आरोप लगाया कि भाजपा शासित मध्य प्रदेश कुप्राशन का केंद्र बन चुका है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गरीबों की मौत पर हमेशा की तरह खामोश हैं। उन्होंने यह दावा भी किया कि जीवन के अधिकार की ‘‘हत्या’’ के लिए भाजपा का ‘‘डबल इंजन’’ जिम्मेदार है।
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘इंदौर में पानी नहीं, ज़हर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं और ऊपर से भाजपा नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी; सरकार ने घमंड परोस दिया।’’ उन्होंने सवाल किया कि लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की तो फिर सुनवाई क्यों नहीं हुई?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते आपूर्ति बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी?’’ उन्होंने कहा, ‘‘ये ‘फोकट’ सवाल नहीं, ये जवाबदेही की मांग है। साफ पानी एहसान नहीं, जीवन का अधिकार है। और इस अधिकार की हत्या के लिए भाजपा का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह ज़िम्मेदार है।’’
राहुल गांधी ने आरोप लगाया, ‘‘मध्यप्रदेश अब कुप्रशासन का केंद्र बन चुका है - कहीं खांसी की सिरप से मौतें, कहीं सरकारी अस्पताल में बच्चों की जान लेने वाले चूहे, और अब सीवर मिला पानी पीकर मौतें। और जब-जब गरीब मरते हैं, मोदी जी हमेशा की तरह खामोश रहते हैं।’’
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से 10 लोगों की मौत की जानकारी मिली है। बहरहाल, स्थानीय नागरिकों ने इस प्रकोप से छह माह के बच्चे समेत 14 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है। इस दावे की स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि नहीं की है।
इंदौर दूषित पानी मामले में मौत पर उमा भारती का तीखा प्रतिक्रिया
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों को लेकर मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सरकार और व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिलसिलेवार प्रतिक्रिया देते हुए इस घटना को प्रदेश, सरकार और पूरी प्रशासनिक व्यवस्था के लिए शर्मनाक और कलंकित बताया है।
उमा भारती ने सवाल उठाया कि दूषित पानी के इस गंभीर मामले में आखिर यह कौन कह रहा है कि सरकार की जिम्मेदारी नहीं बनती या "हमारी चली नहीं।" उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ थे, तो पद पर बैठे रहते हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे और जनता के बीच जाकर उनकी पीड़ा क्यों नहीं समझी। पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा कि वर्ष 2025 के अंत में इंदौर में गंदा पानी पीने से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश और शासन-प्रशासन को शर्मिंदा कर दिया है।
उन्होंने कहा कि जिस शहर को प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला, वहां इतना गंदा और जहरीला पानी लोगों की जान ले रहा है और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। उमा भारती ने मुआवजे की राशि पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिंदगी की कीमत दो लाख रुपये नहीं होती, क्योंकि मृतकों के परिजन जीवन भर इस दुख के साथ जीते हैं।
उन्होंने इसे पाप करार देते हुए कहा कि ऐसे मामलों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता, केवल घोर प्रायश्चित, पीड़ितों से माफी और दोषियों को अधिकतम दंड ही इसका समाधान है। उन्होंने यह भी कहा कि नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी इस अपराध के जिम्मेदार हैं, उन सभी को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए एक बड़ी परीक्षा की घड़ी बताते हुए सरकार से निर्णायक कार्रवाई की अपेक्षा जताई।
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