पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ होगी माघ मेले की शुरुआत: कल्पवासी पहुंचे घाट, जानें स्नान की तिथियां और महत्व
प्रयागराज। प्रयागराज के संगम तट में लगे आस्था के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक समागम माघ मेले में पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ ही शनिवार से माघ मेला क्षेत्र में तप, साधना और संयम की त्रिवेणी प्रवाहित होने लगेगी। भक्ति साधना और संयम की त्रिधारा 'कल्पवास' की शुरुआत पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ होगी। इस बार कल्पवासियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि की वजह से योगी सरकार ने कल्पवासियों के लिए भी विशेष इंतजाम किए हैं।
माघ मेला तीन जनवरी को पौष पूर्णिमा से प्रारंभ होकर 15 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलेगा। संगम तट पर आयोजित होने वाला माघ मेला धर्म, अध्यात्म और संस्कृति का देश का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन है। पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ ही ज्ञान , भक्ति और साधना की विविध धाराएं यहां प्रवाहित होने लगेंगीं।
माघ मेला क्षेत्र में एक तरफ दंड धारण करने वाले दंडी संतों और रामानंदी आचार्य संतो और मुकाम धारी खालसा के संतों की दुनिया होगी तो वहीं होगा चतुष्पीठ के शंकराचार्यों का वैभव। अध्यात्म के इस सागर में यहां कल्पवासियों के जप, तप और संयम की त्रिवेणी अभी से प्रवाहित होने लगी है।
पौष पूर्णिमा से पूरे एक महीने तक गंगा और यमुना की रेत पर तंबुओं के शिविर बनाकर ठिठुरती ठंड में साधना करने वाले इन कल्पवासियों की संख्या में इस साल अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। मेला प्रशासन का अनुमान है कि इस बार 4 लाख कल्पवासी माघ मेले में कल्पवास करेंगे। कल्पवासियों को माघ मेले का प्रथम साधक माना जाता है जिनके बिना माघ मेले के आयोजन की कल्पना भी नहीं संभव है।
माघ मेला क्षेत्र में इन्हें बसाना मेला प्रशासन की प्राथमिकता होती है। एडीएम माघ मेला दयानन्द प्रसाद बताते हैं कि इस बार महाकुंभ 2025 के भव्य और दिव्य आयोजन की स्मृति और 12 साल बाद कल्पवास के संकल्प लेने की परम्परा के चलते कल्पवासियों की संख्या बढ़ गई है। इसे देखते हुए पहली बार माघ मेला क्षेत्र में कल्पवासियों के लिए एक अलग से भी 950 बीघे में एक नगर बसाया गया है जिसे प्रयागवाल नाम दिया गया है।
नागवासुकी मंदिर के सामने गंगा नदी के पार इसे बसाया गया है। तीर्थ पुरोहितों और मेला प्रशासन के साथ आपसी विचार विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया है। वैसे तीर्थ पुरोहितों की मांग और सहूलियत को देखते हुए विभिन्न सेक्टरों में भी कल्पवासियों के लिए तंबू लगाए गए हैं। कल्पवासी की उम्र और अवस्था को देखते हुए इन्हें बसाया जा रहा है। मेला क्षेत्र में मूल रूप से कल्पवास करने वाले इन श्रद्धालुओं को गंगा के तटों के पास ही तंबुओं की व्यवस्था की गई थी ताकि सुबह प्रतिदिन इन्हें गंगा स्नान के लिए दूर तक न चलना पड़े।
योगी सरकार माघ मेला क्षेत्र को दिव्य ,भव्य और स्वच्छ स्वरूप दे रही है। इसके लिए संपूर्ण मेला क्षेत्र में स्वच्छता के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। मेला प्रशासन के मुताबिक विभिन्न सेक्टर में बस रहे कल्पवासियों के शिविर में भी स्वच्छता को प्राथमिकता दी जा रही है। कल्पवासियों से भी अपील की जाएगी कि वह सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल शिविर में न करें।
बुजुर्ग कल्पवासियों के लिए शीत लहरी से बचाव हो इसके लिए भी प्रशासन कई कदम उठा रहा है। प्रशासन ने कल्पवासियों के शिविर के बाहर अलाव जलाने की व्यवस्था की थी ताकि शीत लहरी से कल्पवासियों का बचाव हो सके। माघ मेला के दौरान पहला स्नान पर्व पौष पूर्णिमा तीन जनवरी को,दूसरा स्नान पर्व 14 जनवरी को मकर संक्रांति, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या,23 जनवरी को बसंत पंचमी, एक फरवरी को माघी पूर्णिमा और छठा व अंतिम स्नान पर्व 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का होगा।
