अब किसानों के खेतों में लहलाएगी ‘गोवर्धन’, सीएसए विवि की नवविकसित सरसो को मिली बिक्री की अनुमति

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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कानपुर, अमृत विचार। किसानों के खेतों में अब नई प्रजाति की सरसो ‘गोवर्धन’ भी लहलाएगी। इसकी वजह सीएसए विवि की नवविकसित सरसों को मिली बिक्री की अनुमति है। दावा किया गया कि नई सरसो की विकसित प्रजाती 120 से 125 दिनों में पककर तैयार होती है। इसके अलावा इसमें उच्च तेल सामग्री भी मौजूद है। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के के तहत केंद्रीय बीज समिति ने सीएसए की ओर से नवविकसित सरसो की प्रजाति की अधिसूचना जारी कर दी है।इसके तहत अब पूरे देश में यह बिक्री के लिए मौजूद हो सकेगी। इस नवीन प्रजाति को खेती के लिए भी मंजूरी दे दी गई है।  

माना जा रहा है कि ये उत्तर प्रदेश में सरसो क्षेत्र की वृद्धि और उत्पादकता में योगदान देने के लिए तैयार हैं। कृषि विश्वविद्यालय कानपुर के सरसों अभिजनक प्रोफेसर डॉ. महक सिंह ने बताया कि नवविकसित सरसो प्रजाति उत्तर प्रदेश के सभी कृषि-जलवायु परिस्थितियों में खेती के लिए अतिविलम्ब की दशा में (20 से 30 नवंबर ) उपयुक्त है।

इस किस्म से किसानों को बेहतर पैदावार और प्रचलित बीमारियों और कीटों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की क्षमता है। उन्होंने यह भी बताया कि विकसित सरसो की प्रजाति ‘गोवर्धन’ (केएमआरएल 17-5) असाधारण विशेषताओं को प्रदर्शित करती है। जो इसे किसानों के लिए उपलब्ध सरसो की किस्मों के साथ  एक मूल्यवान अतिरिक्त क़िस्म बनाती है।

यह किस्म अपनी उच्च उत्पादकता क्षमता और अनुकूलनशीलता के साथ सरसों की खेती के परिदृश्य में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ ही उत्पादन के क्षेत्र में गेम-चेंजर होने की पूरी उम्मीद रखती है। इस किस्म में उच्च तेल सामग्री और जैविक तथा अजैविक तनावों का प्रतिरोध शामिल है,जो इसे बेहतर पैदावार और लचीलापन चाहने वाले किसानों के लिए एक पसंदीदा विकल्प बनाता है। 

120 दिनों में तैयार

सरसो के बारे में प्रोफेसर डॉ. महक सिंह ने बताया कि इसमें तेल की मात्रा अधिक लगभग 39.6 फीसदी है। फसल 120-125 दिनों में पककर तैयार होती है। यह राष्ट्रीय किस्मों से 7.81 फीसदी अधिक उपज देती है। जो इसे किसानों के लिए एक वरदान बनाती है। 

किसानों को मिला विकल्प

निदेशक शोध डॉ. आरके यादव ने बताया कि सरसो की इस नई प्रजाति के आने से किसानों को उनकी विशिष्ट कृषि आवश्यकताओं और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप व्यापक विकल्प उपलब्ध होने की पूरी उम्मीद है। उन्होंने बताया कि देश भर के विभिन्न क्षेत्रों के लिए गुणवत्ता मानकों, उत्पादकता क्षमता और उपयुक्तता के अनुरूपता सुनिश्चित करने के लिए किस्म का कठोर परीक्षण और मूल्यांकन किया गया है। 

कृषि नवाचार बढ़ा

विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान ने बताया कि केंद्रीय बीज समिति द्वारा इस भारतीय सरसों की प्रजाति को मंजूरी देना कृषि नवाचार को बढ़ावा देने, फसल उत्पादकता बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा तिलहन मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आनुवंशिक विविधता और उन्नत सरसो की किस्मों की उपलब्धता का विस्तार करके, सरकार का लक्ष्य किसानों को उच्च पैदावार, बेहतर फसल गुणवत्ता और बढ़ी हुई लाभप्रदता प्राप्त करने में सहायता करना है। 

किसानों के लिए वरदान

मंडलायुक्त एवं विश्वविद्यालय के कुलपति के विजयेंद्र पांडियन ने सरसों की गोवर्धन प्रजाति विकसित करने वाले वैज्ञानिकों की टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर यह प्रजाति देश एवं प्रदेश के किसानों के लिए वरदान साबित होगी।

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