आयुर्वेद को मिलेगा नया विश्वास: सीमैप के 14 दवाओं के रेफरेंस स्टैंडर्ड से बढ़ेगी वैश्विक स्वीकार्यता

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: भारतीय दवाओं खासकर आयुर्वेद की गुणवत्ता से लेकर प्रामाणिकता तक पहले से अधिक विश्वस्तर पर होने जा रही है। इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के मानकों के अनुसार भारत ने पहली बार 14 भारतीय निर्देशक द्रव्य जारी किया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने अपने मानक पर सही पाया है। यह कमाल किया है सीएसआईआर-सीमैप लखनऊ के वैज्ञानिकों के दल ने जिसे सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री जीतेंद्र सिंह की उपस्थिति में वैज्ञानिकों ने जारी किया है।

सीएसआईआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स द्वारा विकसित 14 भारतीय निर्देशांक द्रव्य देश के स्वदेशी प्रमाणित संदर्भ पदार्थ हैं। जो आयुष दवाओं की गुणवत्ता, शुद्धता और माप की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इनके विकसित होने से अब हर्बल, फार्मास्युटिकल और न्यूट्रास्युटिकल उद्योगों को परीक्षण विधियों के सत्यापन, उपकरणों के अंशांकन (कैलिब्रेशन) और गुणवत्ता मानकों के पालन में बड़ी सुविधा मिलेगी। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी। यह पहल वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की है, जिसे सीएसआईआर-सीमैप और सीएसआईआर-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी ने मिलकर विकसित किया है।

80वें स्थापना दिवस पर हुआ विमोचन

सीएसआईआर-एनपीएल के 80वें स्थापना दिवस के अवसर पर इन निर्देशक द्रव्यों का विमोचन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, सीएसआईआर की महानिदेशक एवं डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलाईसेल्वी, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध त्रिवेदी और मुख्य वैज्ञानिक डॉ. करुणा शंकर भी शामिल रहे।

आयुष उद्योग को मिलेगा बड़ा लाभ

इन स्वदेशी भारतीय निर्देशांक द्रव्यों के उपलब्ध होने से आयुष दवाओं की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की हो सकेगी। साथ ही दवाओं की जांच पड़ताल में पारदर्शिता बढ़ेगी और भारतीय हर्बल उत्पादों की वैश्विक स्वीकार्यता मजबूत होगी।

भारत में करीब 8 हजार औषधीय वनस्पतियों का उपयोग हो रहा है। जिसके लिए 11,00 से अधिक निर्देशक द्रव्य चाहिए। सीएसआईआर-सीमैप ने पहली बार स्वदेशी 14 निर्देशक द्रव्य बनाएं हैं। अगले एक साल में हमारा लक्ष्य 100 से अधिक द्रव्य निर्माण करने का है। इससे हम अपने उत्पाद को विश्वस्तरीय मानकीकरण देश में करेंगे जिसे पूरी दुनिया स्वीकार करेगी।

डॉ. करुणा शंकर, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-सीमैप, लखनऊ

यह उपलब्धि न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि देश को गुणवत्ता मानकों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम भी है।

 

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