सड़क सुरक्षा माह : यातायात नियमों की अनदेखी...सबसे ज्यादा युवा, सरकारी कर्मी नहीं कर रहे नियमों का पालन

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Published By Anjali Singh
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अयोध्या, अमृत विचार। जनवरी 2026 का महीना पूरे देश में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के रूप में मनाया जा रहा है। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय की पहल पर एक से 31 जनवरी तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य यातायात नियमों का पालन कराकर सड़क दुर्घटनाओं को कम करना है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शहर की सड़कों पर हेलमेट न पहनने, ओवरस्पीडिंग, ट्रिपल राइडिंग और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने जैसे उल्लंघनों की बाढ़ आई हुई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन उल्लंघनों में युवा सबसे आगे हैं। सरकारी कर्मचारी भी पीछे नहीं हैं।

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह की शुरुआत होते ही परिवहन विभाग व यातायात पुलिस ने सघन चेकिंग शुरू कर दी है। इसके बाद भी सड़कों पर बिना हेलमेट दौड़ते दोपहिया वाहन आम नजारा हैं। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 में यातायात पुलिस ने स्वयं व ट्रैफिक सिग्नल की मदद से यातायात नियमों का पालन न करने पर करीब 2.50 लाख चालान किए। इसमें सबसे ज्यादा करीब डेढ़ लाख चालान बिना हेलमेट चला रहे वाहन चालकों का है। वहीं, सड़क दुर्घटनाओं में बाइक चालकों की मौतों का बड़ा कारण हेलमेट न पहनना है। पिछले वर्ष हेलमेट न पहनने वाले 256 चालकों ने जान गंवाई थी। आंकड़े यह भी बताते हैं कि चालान के साथ जान गंवाने वालों में सबसे ज्यादा युवा व किशोर ही हैं।

आज भी सड़कों पर बिना हेलमेट बाइक चलाने वालों में सबसे ज्यादा युवा हैं। कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राएं, नौकरीपेशा युवा और किशोर अक्सर हेलमेट को बोझ समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में जोखिम लेने की प्रवृत्ति ज्यादा होती है, जिससे वे नियमों की अनदेखी करते हैं। कई जगहों पर पुलिस ने युवाओं को निशुल्क हेलमेट बांटे और जागरूकता रैलियां निकालीं, लेकिन प्रभाव सीमित दिख रहा है।

नियम सिखाने वाले भी नहीं पेश कर पा रहे उदाहरण

-नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों में सरकारी कर्मचारी व अधिकारी भी पीछे नहीं हैं। बीते वर्ष मंडलायुक्त द्वारा एक आदेश जारी किया गया था कि कार्यालय आने वाले कर्मचारी व अधिकारियों के लिए हेलमेट व सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य है। ऐसा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई थी, लेकिन आज इन आदेशों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया है। सरकारी वाहनों पर बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के कर्मचारियों व अधिकारियों को देखा जा रहा है। दूसरों को नियम सिखाने की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिसकर्मी भी खुद उदाहरण पेश नहीं कर पा रहे हैं।

प्रबुद्धजन बोले, नाबालिगों को चाबी देकर अभिभावक कर रहे गलती

-मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ वीरेंद्र वर्मा का कहना है कि माता-पिता अपने नाबालिग बच्चों को स्कूल या ट्यूशन के नाम पर बाइक-स्कूटर की चाबी थमा देते हैं, जो कानूनन अपराध है। नए नियमों के तहत नाबालिग ड्राइविंग पर अभिभावकों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अपील की कि बालिग होने पर, वाहन चलाने में दक्ष होने व ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के बाद ही बच्चों को वाहन की चाबी दें।

यातायात नियमों का पालन करना आदत में डाले

-प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष डॉ संजय सिंह का कहना है कि हमें बाइक चलाते समय हेलमेट लगाना व यातायात नियमों का पालन करना अपनी आदतों में शामिल करना होगा। इससे आप सिर्फ अपनी ही नहीं बल्कि दूसरों की भी जान बचा सकते हैं। कहा कि अभिभावक जिम्मेदारी समझें और बच्चों को साइकिल या सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल कराएं।

-इस बार सड़क सुरक्षा माह में सरकार ने चार ई मॉडल शिक्षा, प्रवर्तन, इंजीनियरिंग और इमरजेंसी केयर पर फोकस किया है। इसके तहत स्कूल-कॉलेजों में सेमिनार, पोस्टर प्रतियोगिताएं और जागरूकता रैलियां हो रही हैं, लेकिन जब तक हर व्यक्ति खुद जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक सड़कें असुरक्षित रहेंगी। सड़क सुरक्षा माह सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का संकल्प होना चाहिए। युवाओं, अभिभावकों और सरकारी कर्मचारियों से अपील है कि नियमों का पालन करें। एक छोटी लापरवाही पूरी जिंदगी छीन सकती है-डॉ आरपी सिंह, एआरटीओ अयोध्या।


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