स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत बिजली दरों में जोड़ने की तैयारी, उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
On

उपभोक्ता परिषद ने इस पूरे मामले पर जताया कड़ा विरोध

लखनऊ, अमृत विचार: राज्य में पुराने बिजली मीटरों को हटाकर लगाए जा रहे स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की लागत अब उपभोक्ताओं से बिजली दरों के जरिए वसूलने की तैयारी की जा रही है। पावर कॉरपोरेशन ने वर्ष 2026-27 के लिए दाखिल अपनी वार्षिक राजस्व एआरआर में स्मार्ट मीटरों के लिए लगभग 3800 से 4000 करोड़ रुपये जोड़ने का प्रस्ताव नियामक आयोग को भेजा है। यह प्रस्ताव मार्च 2026 तक लगाए जाने वाले स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के अनुमान के आधार पर तैयार किया गया है। यदि नियामक आयोग इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देता है तो अगले वित्तीय वर्ष में बिजली दरों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, पावर कॉरपोरेशन की ओर से नियामक आयोग में दाखिल प्रस्ताव में केवल पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एआरआर में ही 1109 करोड़ रुपये जोड़ने की मांग की गई है। अनुमान है कि मार्च 2026 तक पूर्वांचल क्षेत्र में करीब 39.29 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे। इसी तर्ज पर अन्य वितरण निगमों में भी लगाए जाने वाले मीटरों की लागत को बिजली दरों में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है।

पावर कॉरपोरेशन ने ओपेक्स (ऑपरेशनल एक्सपेंडीचर) मॉडल के तहत प्रति स्मार्ट प्रीपेड मीटर 114.57 रुपये की लागत बिजली दरों के माध्यम से वसूलने की बात कही है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉरपोरेशन के इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि भारत सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की लागत उपभोक्ताओं से नहीं ली जाएगी। ऐसे में एआरआर में मीटर की कीमत जोड़ना पूरी तरह गलत है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 10 सितंबर से अब तक लगभग 3.33 लाख विद्युत उपभोक्ताओं से स्मार्ट प्रीपेड मीटर की लागत के नाम पर प्रति उपभोक्ता 6016 रुपये की दर से कथित रूप से गलत वसूली की गई है, जिस पर पावर कॉरपोरेशन को स्थिति को साफ करनी चाहिए। परिषद ने आगे कहा कि यदि भविष्य में बिजली दरों में स्मार्ट मीटर की लागत जोड़ी जाती है, तो यह उपभोक्ताओं पर दोहरा आर्थिक भार होगा, जो पूरी तरह अनुचित और उपभोक्ता हितों के खिलाफ है। अब सभी की नजरें नियामक आयोग के फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की लागत आखिरकार उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ेगी या नहीं।

संबंधित समाचार