दरम्वाल गैंग से दुश्मनी, मामला सुलझाने गए थे नितिन और कमल
- पार्षद अमित के घर जाने से पहले किया था अमित के बेटे को फोन - दरम्वाल गैंग और पार्षद पुत्र के बीच समझौता कराना चाहता था कमल
सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी।
अमृत विचार: हत्या की इस सनसनीखेज वारदात के तार दरम्वाल गैंग से जुड़ते नजर आ रहे हैं। ये दरम्वाल गैंग राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। क्योंकि गोली चलाने से पहले अमित उर्फ चिंटू ने दरम्वाल गैंग का नाम लिया था और फिर ताबड़तोड़ फायर झोंक दिए। अमित ने गोली चलानी तब तक नहीं रोकी, जब तक एक मौत के घाट तक नहीं उतर गया। सूत्रों का कहना है कि नितिन और पार्षद अमित का पुत्र जय दोस्त हैं। जबकि कम उम्र होने के बावजूद कमल और पार्षद अमित में दोस्ती है, लेकिन कमल की दरम्वाल गैंग से ज्यादा करीबियां हैं। बताया जाता है कि किसी बात को लेकर पार्षद पुत्र जय और दरम्वाल गैंग के लीडर के परिवार से जुड़े से युवक के बीच दुश्मनी हो गई थी। यह युवक सीधे तौर पर कमल के संपर्क में था। रविवार को जब नितिन और कमल पार्टी में थे, तभी कमल ने इस दुश्मनी की चर्चा नितिन से की। इसके साथ ही उससे यह भी कहा कि किसी तरह दोनों के बीच सुलह करानी है और सबसे पहले यह जानना है कि आखिर दोनों के बीच दुश्मनी की वजह क्या है।
पार्टी से फ्री होने के बाद नितिन ने जय को फोन किया और इसी मसले को लेकर मिलने की इच्छा जाहिर की। जय ने यह बात अपने पिता अमित को बताई। जिसके बाद ही अमित असलहा लेकर तैयार हो गया। स्कूटी सवार नितिन और कमल, अमित के घर पहुंचे। कमल ने डोर बेल बजाई। इसी बीच अमित और जय अपनी बालकनी पर आए। बालकनी पर आते ही अमित ने कहा कि दरम्वाल गैंग से हो और एक के बाद एक दो फायर झोंक दिए। गोलियां चलते ही कमल एसटीएच की ओर पैदल भागा, जबकि नितिन अपनी स्कूटी से। हालांकि नितिन ज्यादा दूर भाग नहीं पाया। अमित ने पीछे से उस पर फायर झोंका। इधर, जान बचाकर भाग रहे कमल ने जब नितिन को गिरते देखा तो वापस लौटा तो लेकिन आरोपी ने उस पर असलहा तान दिया। कमल घबरा कर वहां से भागा और फोन पर पुलिस को सूचना दी।
हत्या की वारदात को बनाया हमले का षड्यंत्र
हल्द्वानी : नितिन को बेरहमी से मौत के घाट उतारने वाले अमित ने खुद को बचाने के लिए पूरी घटना का रुख मोड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं हो पाया। पुलिस के मुताबिक, नितिन को अमित की तीसरी गोली से मरा। इसके बाद अमित लौट कर अपने घर पहुंचा और घर के बाहर से ही अपनी घर की खिड़की पर फायर झोंका। इस फायर से खिड़की की चौखट का हिस्सा छतिग्रस्त हो गया। अमित ने अपने घर में लगे सीसीटीवी की डीवीआर से भी छेड़छाड़ की। इसके बाद उसने खुद पुलिस को फोन किया और बताया कि कुछ लोग उसके घर पहुंचे और उन पर गोलियां चलाईं। उन्होंने भी जवाबी फायर किया और इस फायरिंग में एक युवक को गोली लगी है। पुलिस मौके पर पहुंची तो प्राथमिक जांच की तो अमित की कहानी में झोल नजर आया। जिसके बाद उसे और उसके पुत्र जय को हिरासत में ले लिया गया।
संयम नहीं तो राजनीति में रहने का अधिकार नहीं : पूर्व सीएम हरीश रावत
हल्द्वानी : हत्या की वारदात में भाजपा नेता अमित बिष्ट उर्फ चिंटू का नाम सामने आने के बाद विपक्ष हमलावर हो गया है। घटना के कुछ घंटों बाद ही पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट अपलोड कर राज्य सरकार को निशाने पर लिया। पोस्ट में उन्होंने लिखा, जज फॉर्म हल्द्वानी निवासी नितिन लोहनी की गोली मारकर हत्या अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है। राजनीतिक व्यक्ति यदि संयम नहीं रख सकते तो ऐसे लोगों को राजनीति में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति निरंतर चिंताजनक होती जा रही है और अधिकांश ऐसे मामलों में भाजपा से जुड़े लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। भगवान, दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं उनके परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
चिंटू के लिए धरने पर बैठने वाले विधायक बंशी के खिलाफ आक्रोश
हल्द्वानी : नितिन की हत्या के बाद रात ही लोगों का अस्पताल में जुटना शुरू हो गया था। सुबह मामला चर्चा में आया तो सैकड़ों की संख्या में लोग पोस्टमार्टम हुआ पहुंच गए। भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा और नितिन एक ही कैड़ा गांव के हैं और नितिन के पिता राम सिंह कैड़ा के जजमान भी हैं। जिसके बाद विधायक कैड़ा भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। विधायक सुमित हृदयेश भी पहुंचे। दिन चढ़ने के साथ पोस्टमार्टम हाउस लोगों से खचाखच भर गया। लोग उस घटना को याद कर रहे थे, जब हत्यारोपी अमित उर्फ चिंटू का एक मारपीट का वीडियो वायरल हुआ था। कोतवाली पुलिस ने अमित को हिरासत में ले लिया था। इसके खिलाफ अगली सुबह विधायक बंशीधर भगत कोतवाली के बाहर सड़क पर धरने पर बैठ गए थे। पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा और अमित को छोड़ना पड़ा। पोस्टमार्टम हाउस में लोग कह रहे थे कि अगर विधायक बंशीधर भगत ने उस दिन अमित का साथ न दिया होता तो शायद आज यह नौबत न आती। लोग विधायक से खासे नाराज नजर आ रहे थे।
