Birthday Spacial: रेडियो जिंगल से सिने कैरियर तक सुरों का बादशाह जो बना ग्लोबल आइकन, आज मना रहा अपना बर्थडे
इस बीच रहमान ने मास्टर धनराज से संगीत की शिक्षा हासिल की और दक्षिण फिल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार इल्लय राजा के समूह के लिये 'की बोर्ड' बजाना शुरू कर दिया उस समय रहमान की उम्र महज 11 वर्ष थी। इस दौरान रहमान ने कई बड़े एवं नामी संगीतकारों के साथ काम किया इसके बाद रहमान ने लंदन के ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ म्यूजिक में स्कॉलरशिप का मौका मिला जहां से उन्होंने वेस्टर्न क्लासिकल म्यूजिक की स्नातक की डिग्री भी हासिल की।
स्नातक की डिग्री लेने के बाद रहमान घर आ गये और उन्होंने अपने घर में हीं एक म्यूजिक स्टूडियों खोला और उसका नाम पंचाथम रिकार्ड इन रखा । इस दौरान रहमान ने लगभग एक साल तक फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिये संघर्ष करते रहे और टीवी के लिये छोटे मोटे संगीत देने और रेडियो जिंगल बनाने का काम करते रहे। वर्ष 1992 रहमान के सिने कैरियर का महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ।
अचानक उनकी मुलाकात फिल्म निर्देशक मणि रत्नम से हुयी। मणि उन दिनो फिल्म रोजा के निर्माण में व्यस्त थे और अपनी फिल्म के लिये संगीतकार की तलाश में थे। उन्होंने रहमान को अपनी फिल्म में संगीत देने की पेशकश की । कश्मीर आतंकवाद के विषय पर आधारित इस फिल्म में रहमान ने अपने सुपरहिट संगीत से श्रोताओं का दिल जीत लिया और इसके साथ हीं वह सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये।
इसके बाद रहमान ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा और फिल्मों में अपने एक से बढकर एक एवं बेमिसाल संगीत से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद रहमान ने तिरूड़ा तिरूड़ा, बांबे, जैंटलमैन, इंडियन और कादलन आदि फिल्मों में भी सुपरहिट संगीत दिया और संगीत जगत में अपनी अलग पहचान बना ली। रहमान ने कर्नाटक संगीत, शास्त्रीय संगीत और आधुनिक संगीत का मिश्रणकर श्रोताओं को एक अलग संगीत देने का प्रयास किया।अपनी इन्हीं खूबियों के कारण वह श्रोताओं में बहुत लोकप्रिय हो गए।
इसके बाद रहमान निर्माता..निर्देशको की पहली पसंद बन गये और वे रहमान को अपनी फिल्म में संगीत देने के लिये पेशकश करने लगे। वर्ष 1997 में भारतीय स्वतंत्रता की 50 वीं वर्षगांठ पर उन्होंने स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के साथ मिलकर वंदे मातरम यानी मां तुझे सलाम का निर्माण किया। इसके बाद वर्ष 1999 में रहमान ने कॉरियोग्राफर शोभना, प्रभुदेवा और उनके डांसिंग समूह के साथ मिलकर माइकल जैक्सन के माइकल जैक्सन एंड फ्रैंड्स टूर के लिये म्यूनिख, जर्मनी में कार्यक्रम पेश किया।
इसके बाद रहमान को म्यूजिक कान्सर्ट में भाग लेने के लिये विदेशो से भी प्रस्ताव आने लगे। उन्होंने पाश्चात्य संगीत के साथ साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत के मिश्रण को लोगों के सामने रखना शुरू कर दिया था। ए.आर रहमान को बतौर संगीतकार अब तक दस बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इन सबके साथ ही अपने उत्कृठ संगीत के लिये ए.आर .रहमान को छह बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें पद्यश्री और पद्मभूषण से भी नवाजा जा चुका है।
इन सबके साथ ही विश्व संगीत में महत्वपूर्ण योगदान के लिये वर्ष 2006 में उन्हें स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में सम्मानित किया गया । रहमान के सिने कैरियर में एक नया अध्याय उस समय जुड गया जब ए आर रहमान ने फिल्म स्लमडाग मिलिनेयर के लिए दो आस्कर पुरस्कार जीतकर नया इतिहास रच दिया। रहमान को 81वें एकादमी अवार्ड समारोह में इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। रहमान आज भी उसी जोशो खरोश के साथ संगीत जगत को अपने जादुई संगीत से सुशोभित कर रहे है।
