सहारनपुरः मार्च तक पूरी तरह से पुनर्जीवित हो जाएगी विलुप्त सिंधली नदी

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Published By Muskan Dixit
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सहारनपुरः उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में पांच-छह दशक पूर्व विलुप्त हो चुकी सिंधली नदी को नया जीवन मिलने जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी सुमित राजेश महाजन ने मंगलवार को बताया कि मार्च तक यह नदी पूरी तरह से पुनर्जीवित हो जाएगी और अपने पुराने स्वरूप में दिखाई देगी। इसके लिए प्रशासन ने भागीरथ प्रयास किए हैं। एक सामाजिक कार्यकर्त्ता अमित कुमार की याचिका पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण यानि (एनजीटी) ने प्रशासन को इस विलुप्त नदी को पुनर्जीवित करने के आदेश जारी किए थे। इस पर युद्ध स्तर पर कार्य शुरू किया गया। पूरे नदी क्षेत्र की भूमि पर किसान कब्जा करके खेती कर रहे थे। कुछ किसानों ने अपनी मर्जी से जगह छोड़ दी, कुछ से छुड़वाई गई।

राजस्व विभाग और ब्लाक यानि ग्राम पंचायतों ने मिलकर नदी क्षेत्र की खुदाई कराई। सुमित राजेश महाजन के मुताबिक प्रशासन ने पुराने अभिलेखों के अनुसार इसकी चौड़ाई, गहराई तक मिट्टी की खुदाई कराई और उसको पुराना स्वरूप भी देने का प्रयास किया। कहीं इसकी चौड़ाई साढ़े दस मीटर तो कहीं तीन-चार मीटर है। मूलरूप से यह बरसाती नदी है और इसकी कुल लंबाई 28 से 30 किलोमीटर तक है। यह सहारनपुर के नकुड़ क्षेत्र के गांव थामनी से शुरू होकर पड़ोसी जिले शामली के ब्लाक एवं गांव चौसाना तक है।

सहारनपुर में मुश्किल से दो-ढाई किलोमीटर का काम बाकी है और इस जनपद में इसकी लंबाई 28 किलोमीटर है। यह नदी खेतों में सिंचाई के लिए प्रयोग में आती थी। अब इसके फिर से बहने लगने से पचासों गांवों के हजारों किसानों को सिंचाई के लिए प्रचुर मात्रा में पानी उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही इलाकाई पारिस्थितिकी तंत्र (इकोलोजिकल सिस्टम) मजबूत होगा। इस पर करीब डेढ़ करोड़ रूपए की लागत आई है। खुदाई का ज्यादातर काम मनरेगा के तहत हुआ है। कुछ ग्राम पंचायतों ने अपने फंड से खुदाई कराई। सीडीओ के अनुसार इसकी विलुप्त धारा को ड्रोन सर्वे और रिमोट सेंसिंग एजेंसियों की मदद से चिन्हित किया गया। सहारनपुर के दो ब्लाक नकुड़ और गंगोह क्षेत्रों में इसका अस्तित्व है।

महाजन ने बताया कि इस नदी को पुनर्जीवित करने में करीब एक साल का समय लगा। कई स्थानों पर इस नदी में अभी भी पानी की धारा बह रही है। मुख्य रूप से यह नदी गांव किशनगढ़, बसी, सिनौली, कल्लरहेड़ी, हुसेनपुर, बुड्ढ़ाखेड़ा, लखनौती, सनौली, सुखेड़ी, आलमपुर, पखनपुर, शकरपुर शाकौर, खालिदपुर, बीमपुर, इस्सोपुर कलालहटी और चौसाना आदि गांव इस नदी का हिस्सा हैं।

जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कहा कि बहुत जल्द ही सिंधुली नदी फिर से कलकल करती बहते हुए दिखेगी। गंगोह में वीडीओ रहे और वर्तमान में देवबंद में कार्यरत अमित नारंग की देखरेख में काफी काम हुआ। अब मौजूदा वीडीओ असलम परवेज इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। गंगोह क्षेत्र में तीन तकनीकी सहायक नेहा, रवि प्रकाश और दीपांशु कुमार की देखरेख में कार्य प्रगति पर है।

गौरतलब है कि जिलाधिकारी मनीष बंसल ने इससे पूर्व संभल में अपनी नियुक्ति के दौरान भी वहां की एक मृत नदी को नया जीवन प्रदान कर पुनर्जीवित किया था। जिसका उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में करते हुए मनीष बंसल के नेतृत्व और कार्यकुशलता की उदारता से सराहना की थी। अपनी उसी खूबी का प्रदर्शन उन्होंने सहारनपुर में भी कर दिखाया है। खास बात यह है कि आईआईटी दिल्ली के टापर और आईएस में भी ऊंची रैकिंग हासिल करने वाले मनीष बंसल एक सुयोग्य पर्यावरणविद् भी हैं।

शायद यही कारण है कि उन्होंने सहारनपुर जो अवैध खनन परिवहन और कारोबार के लिए जाना जाता था। उन्होंने वहां इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह से अंकुश लगा दिया है। इस संबंध में उनका कहना था कि चार महीने के भीतर इसके बेहतर नतीजे दिखेंगे। जब सभी वैध खनन पट्टो पर वैध रूप से खनन शुरू हो जाएगा तो अवैध कारोबार की गुंजाइश भी नहीं बचेगी।

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