सीएम योगी ने अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए 'कैपेसिटी बिल्डिंग' कार्यक्रम को अनिवार्य बनाने के दिए निर्देश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए 'कैपेसिटी बिल्डिंग' कार्यक्रम को अनिवार्य बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक दक्षता, तकनीकी दक्षता और सेवा वितरण की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सतत प्रशिक्षण समय की मांग है।
मुख्यमंत्री ने यह निर्देश 'मिशन कर्मयोगी' के तहत राज्य में अब तक हुई प्रगति और आगामी कार्ययोजना की समीक्षा बैठक के दौरान दिए। उन्होने कहा कि सभी विभाग अपनी-अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार कर उन्हें आईगॉट कर्मयोगी पोर्टल पर अपलोड करें, ताकि अधिकारियों और कर्मचारियों को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागों और सरकारी संस्थाओं के पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'मिशन कर्मयोगी' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक परिवर्तनकारी पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी ट्रेनिंग सेंटर्स के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग से जुड़े पाठ्यक्रम अवश्य विकसित किए जाएं और प्रशिक्षण की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए सात दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम को अनिवार्य किया जाए, जिससे कार्यकुशलता, निर्णय क्षमता और जनसेवा की प्रभावशीलता में निरंतर सुधार हो सके।
बैठक में बताया गया कि आईगॉट कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। अब तक प्रदेश से 18.8 लाख से अधिक कार्मिक इस प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं। यह संख्या वर्ष 2025 में देश भर में हुई कुल ऑनबोर्डिंग का लगभग 93 प्रतिशत है, जो राज्य की मजबूत प्रशासनिक प्रतिबद्धता और तकनीकी तत्परता को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को सुशासन और दक्ष प्रशासन का मॉडल राज्य बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है और आने वाले समय में प्रशिक्षण के दायरे को और व्यापक किया जाएगा।
