Bareilly : पहल...स्कूलों में अखबार भी बनेगा पठन संस्कृति का हिस्सा
बरेली, अमृत विचार। डीआईओएस और बीएसए ने जिले के सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को प्रार्थना सभा के दौरान प्रतिदिन 10 मिनट प्रतिष्ठित हिंदी अखबार का वाचन अनिवार्य रूप से कराए जाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों की शब्दावली, भाषा शैली और अभिव्यक्ति क्षमता में सुधार होगा। साथ ही छात्रों को राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और खेल जगत से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं की जानकारी मिलेगी, जिससे उनका समसामयिक ज्ञान भी सुदृढ़ होगा।
डीआईओएस डा. अजीत सिंह के जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अखबारों में प्रकाशित खबरें विद्यार्थियों को समाज और देश-दुनिया से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। समाचार पत्रों में प्रकाशित घटनाएं, सामाजिक मुद्दे और विविध अनुभव विद्यार्थियों को दूसरों की चुनौतियों और परिस्थितियों को समझने में मदद करते हैं। इससे उनमें संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना का विकास होता है। अखबारों में उपलब्ध सुडोकू, क्रॉसवर्ड और शब्द पहेलियां बच्चों के लिए तार्किक चुनौतियां प्रस्तुत करती हैं, जो उनकी समस्या समाधान क्षमता और बौद्धिक कौशल को मजबूत बनाती हैं। इसी उद्देश्य से यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि समाचार पत्र विद्यालय में विद्यार्थियों की पहुंच में आसानी से उपलब्ध हों और प्रार्थना सभा में 10 मिनट का समय विशेष रूप से समाचार वाचन के लिए निर्धारित किया जाए।
बीएसए विनीता सिंह ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि पुस्तकों के साथ-साथ समाचार पत्रों को विद्यालयों में दैनिक पठन संस्कृति का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इससे बच्चे अपने स्थानीय समुदाय, आस-पास होने वाले आयोजनों और विभिन्न सार्वजनिक परियोजनाओं के प्रति जागरूक होंगे। प्रधानाचार्यों से अपील की कि वे इस आदेश को गंभीरता से लागू करें ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण बौद्धिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित किया जा सके।
रोज कठिन शब्दों का अर्थ बताना जरूरी
प्रतिदिन समाचार पत्र से छह नए व कठिन शब्दों का चयन कर उनका अर्थ बताया जाए। इन शब्दों को विद्यालय के डिस्प्ले बोर्ड या ब्लैक बोर्ड पर ''''आज का सुविचार'''' के साथ अंकित करें। इसके अलावा मासिक या त्रैमासिक स्तर पर विद्यालय स्तर पर समाचार पत्र या ''''पत्रिका'''' तैयार करने के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जाए। कक्षा नौ से 12 के विद्यार्थियों को सप्ताह में एक बार संपादकीय विषय पर मौलिक विचार लिखने या कक्षा में समूह चर्चा के लिए प्रेरित किया जाए। सप्ताह में एक दिन प्रकाशित होने वाले सुडोकू, वर्ग पहेली या ज्ञानवर्धक क्विज को हल करने की प्रतियोगिता कराई जाए ताकि तार्किक क्षमता बढ़े।
