महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने जाहिर की नाराजगी : कुलपति के न मिलने पर लगाए गंभीर आरोप
लखनऊ, अमृत विचार : किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में लव जिहाद मामले को लेकर शुक्रवार को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव को कुलपति से मिलने के लिए कथित तौर पर लगभग 10 मिनट तक खड़ा रखा गया। आरोप है कि इसके बाद भी कुलपति से मुलाकात नहीं हो सकी। इससे नाराज उनके समर्थकों ने प्रशासनिक भवन के बाहर नारेबाजी की। इसके बाद अपर्णा यादव ने प्रशासनिक भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केजीएमयू प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में घटित संवेदनशील घटनाओं की जानकारी समय रहते मुख्यमंत्री और राज्यपाल को नहीं दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला महिला उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना से जुड़ा था, तो इसे दबाने की कोशिश क्यों की गई। अपर्णा यादव ने पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेश बाबू और वाहिद अली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि संबंधित मामले को लगभग 10 दिनों तक दबाकर क्यों रखा गया। साथ ही पूछा कि पीड़िता को महिला आयोग के पास जाने से क्यों रोका गया।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "क्या महिला आयोग को जांच के लिए किसी की अनुमति लेनी पड़ेगी।" इससे पहले केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने शुक्रवार को केजीएमयू परिसर स्थित प्रशासनिक भवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि डॉक्टर रमीज उद्दीन का मामला प्रकाश में आने के बाद उसे निलंबित कर दिया गया था। कमेटी की जांच के आधार पर उसे निष्कासित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि केजीएमयू में नीट के जरिये डॉ. रमीज का दाखिला हुआ था। यहां प्रवेश चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा दिया जाता है। इसलिए रमीज के निष्कासन की संस्तुति उन्होंने चिकित्सा शिक्षा विभाग से करने की तैयारी की है। विवि के चीफ प्रॉक्टर प्रो आर एस कुशवाहा ने बताया कि जांच के दौरान रमीज एक बार कमेटी के सामने उपस्थित हुआ, लेकिन इसके बाद उसका मोबाइल फोन लगातार बंद जा रहा है।
यह था मामला
आरोप है कि पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर रमीज ने एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर को प्रेमजाल में फंसाया। शादी की बात सामने आने पर आरोपी ने महिला डॉक्टर पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता के विरोध करने पर उसे धमकाया गया, जिससे मानसिक रूप से परेशान होकर महिला डॉक्टर ने नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। हालत बिगड़ने पर उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ।
घटना के बाद पीड़िता ने केजीएमयू प्रशासन, पुलिस, मुख्यमंत्री के आईजीआरएस पोर्टल और राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई। मामला सामने आने पर प्रशासन और जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं।
इसमें केजीएमयू में दो कमेटियां मामले की जांच कर रही थीं। यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच विशाखा कमेटी कर रही है, जबकि धर्मांतरण प्रकरण की जांच सात सदस्यीय कमेटी को सौंपी गई है, जिसमें एक सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक भी शामिल हैं। विशाखा कमेटी की जांच रिपोर्ट गुरुवार को सौंपी गई है। जिसमें आरोपी डॉक्टर को दोषी माना गया है।
