प्रदेश में इस साल आलू की अच्छी फसल का अनुमान: कृषक योजना के जरिये खुदाई-खरीद और भंडारण की व्यवस्था के निर्देश
लखनऊ, अमृत विचार : उत्तर प्रदेश प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों में अग्रणी बना हुआ है। इस वर्ष भी अच्छी उपज होने की संभावना जताई जा रही है। उद्यान विभाग के अनुसार, प्रदेश में नये आलू की आवक मंडियों में मध्य दिसंबर से शुरू हो जाती है। मंडियों में नये आलू की अधिक आवक के चलते मांग-आपूर्ति के सिद्धांत के अनुसार, बाजार भाव पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।
निदेशक उद्यान विभाग. भानु प्रकाश राम ने कहा कि आलू उत्पादक कृषक अपनी उपज की खुदाई, विपणन एवं भंडारण की योजना पहले से बनाएं। किसान बाजार भाव की स्थिति को ध्यान में रखते हुए आलू का विक्रय या भंडारण करें, जिससे उन्हें अपनी उपज का अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके।
बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 2243 निजी शीतगृह संचालित हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता लगभग 192 लाख मीट्रिक टन है। वर्ष 2025 में करीब 159 लाख मीट्रिक टन आलू का भंडारण किया गया था, जबकि लगभग 33 लाख मीट्रिक टन क्षमता खाली रही। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में आलू भंडारण के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। शीतगृहों में आलू भंडारण का कार्य सामान्यतः मध्य फरवरी से आरंभ होता है।
वायरस मुक्त आलू बीज से किसानों को होगा दोगुना लाभ
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के मुख्य प्रायोगिक प्रक्षेत्र (सब्जी विज्ञान) का आईसीएआर के उच्च अधिकारियों की टीम ने शुक्रवार को दौरा कर आलू पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के शोध परीक्षणों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने विवि द्वारा आलू की नई उन्नत प्रजातियों और वैज्ञानिक पद्धतियों पर किए जा रहे उत्पादन के कार्यों की सराहना की। अधिकारियों ने बताया कि किसानों के लिए उन्नत प्रजातियों जैसे कुफरी पुखराज, कुफरी ख्याति, कुफरी नीलकंठ अधिक उपयोगी है। इन प्रजातियों से किसान अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। कहा कि वायरस मुक्त आलू बीज से किसानों को होगा दोगुना लाभ होगा।
अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद लखनऊ द्वारा वित्त पोषित "वायरस मुक्त आलू बीज उत्पादन" परियोजना के तहत संचालित शोध कार्यों का भी भ्रमण किया। वैज्ञानिकों ने फसल सुरक्षा में झुलसा रोग एवं फोमा रोग (जिसे किसान परपरा बोलते हैं) को बारीकी से देखा और इनके प्रबंधन के विषय में जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने कहा कि एजोक्सीस्तराबीन टेबुकोनाजोल का एक एमएल प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। इसके साथ ही फसल चक्र अपनाएं जो किसानों को रोग प्रबंधन में मददगार साबित होगा।
क्षेत्रीय केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान मेरठ के निदेशक डॉ. राजेश कुमार सिंह का कहना है कि रोगमुक्त बीज उत्पादन को लेकर विवि तेजी के साथ कार्य कर रहा है, जिससे आने वाले समय में किसानों को इसका दोगुना लाभ मिलेगा। इसका परीक्षण आशीष सिंह की देखरेख में हो रहा है। अनुसंधान परीक्षण का कार्य परियोजना के मुख्य अन्वेषक डॉ. सीएन राम एवं सह-मुख्य अन्वेषक डॉ. प्रदीप कुमार दलाल के संयोजन में हो रहा है।
इस मौके पर चंद्रशेखर आजाद कृषि विवि कानपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार यादव, निदेशक शोध डॉ. शम्भू प्रसाद, निदेशक प्रसार डॉ.आरबी सिंह,निदेशक प्रशासन डॉ.सुशांत श्रीवास्तव, अधिष्ठाता डॉ. भगवानदीन, सब्जी विज्ञान प्रक्षेत्र प्रभारी डॉ. आस्तिक झा, आशीष सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
